कानपुर। 18वें एशियन गेम्स में भारतीयों का जलवा कायम है। भारत ने शानदार प्रदर्शन के साथ एक और मेडल अपने नाम कर लिया है। सेपकटाकरा में भारतीय टीम को कांस्य पदक मिला है। इस पदक को मिलाकर अब भारत के पास कुल नौ मेडल हो गए हैं। इस खेल में थाईलैंड ने 2-0 अंकों के साथ गोल्ड हासिल किया है। बता दें कि इस गेम में भारत की ओर से संदीप कुमार, आकाश युमनाम, हेनरी सिंह वहेंग्बम, हरीश कुमार, मलेम्नगंबा सिंह सोरोखैबम, निकेन सिंह खंगेमबम, सीताराम सिंह थोकचोम, धीरज, जोतिन सिंह, ललित कुमार, संजेक सिंह और जितेशोर शर्मा खेल रहे थे। तो आइए जानें सेपकटाकरा सहित 5 अजब-गजब खेलों के बारे में...
सेपकटाकरा ही नहीं एशियन गेम्स में देखने लायक हैं ये 5 अजब-गजब खेल
1. सेपकटाकरा
यह एक साउथ एशियन स्पोर्ट है जिसे पैरों से खेला जाता है। जिस तरह से किेक वॉलीबाल खेली जाती है यह खेल भी उसी तरह का होता है। इसमें भी गेंद को हाथ से छुए बिना नेट के दूसरी तरफ ढकेलना होता है। इसमें दो टीमें होती हैं और प्रत्येक टीम में 11-11 खिलाड़ी होते हैं। यह एक टीम मैच होता है। जिसे रबर की गेंद से नहीं बल्कि सींक या खपच्ची की बनी बॉल से खेला जाता है। तीन सेट का मैच होता है जिसमें पहले दो सेट जीतने के लिए टीम को 21-21 अंक हासिल करने होते हैं। अगर दोनों टीमें निर्धारित समय में सिर्फ 20-20 प्वॉइंट हासिल करती हैं। मैच टाई होने पर 15 प्वॉइंट का एक और सेट खेला जाता है। एशियन गेम्स 2018 में सेपकटाकरा के कुल 6 मुकाबले खेले जाएंगे।
सेपकटाकरा ही नहीं एशियन गेम्स में देखने लायक हैं ये 5 अजब-गजब खेल
2. कुरश
यह जूडो और रेसलिंग का मिलाजुला रूप है। कुरश एक टर्कीश शब्द है जिसका मतलब होता है 'कुश्ती', हालांकि इसमें पूरी तरह से रेसलिंग के नियम लागू नहीं होते। सेंट्रल एशिया में इसे ट्रेडिशनल मार्शल आर्ट कहा जाता है क्योंकि इस खेल में जूडो की टेकनिक भी इस्तेमाल होती है। जूडो में जिस तरह से 'इप्पन' टॉप स्कोर माना जाता है तो कुरश में इसे 'हलाल' कहते हैं। इस खेल में मेडल सात वेट कैटैगरी में बांटे जाते हैं। इसमें चार पुरुषों के लिए तो तीन महिलाओं के लिए। इस साल कुरश एशियन गेम्स में पहली बार खेला जा रहा है, हालांकि 'एशियन इनडोर एंड मार्शल आर्ट गेम्स' प्रतियोगिता में यह पहले नजर आ चुका। उजबेकिस्तान इस खेल में अव्वल दर्जे की टीम मानी जाती है और मौजूदा समय की वर्ल्ड चैंपियन है।
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3. सॉफ्ट टेनिस
जैसा की नाम से पता चलता है यह टेनिस जैसा खेल है मगर इसमें हार्ड नहीं सॉफ्ट बॉल का इस्तेमाल होता है और परंपरागत टेनिस से इसमें थोड़ा बहुत अंतर होता है। इस खेल का जन्मदाता जापान है इसके नियम वैसे तो टेनिस जैसे ही हैं मगर यह खेल छोटे रैकट से खेला जाता है और गेंद रबर की होती है। इसके अलावा यह खेल सिंगल सेट में खेला जाता और उसी से हार-जीत का फैसला किया जाता है। इस साल सॉफ्ट टेनिस में 5 गोल्ड मेडल दिए जाएंगे, जिसमें पुरुष और महिला (सिंगल), पुरुष और महिला (टीम) और मिक्सड डबल्स टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे।
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4. रोलर स्पीड स्केटिंग
ओलंपिक में जिस तरह स्पीड स्केटिंग का आयोजन होता है एशियन गेम्स में रोलर स्पीड स्केटिंग खेला जाता है। इसमें बस साधारण स्केट्स की जगह रोलर स्केट्स पहने जाते हैं। इसका आयोजन ट्रैक और रोड सर्किट पर होता है। कहीं-कहीं इसे इन लाइन स्पीड स्केटिंग भी कहा जाता है। इसमें सिर्फ एक इवेंट का आयोजन होता है जिसमें पुरुष और महिला का अलग-अलग होता है। इसमें खिलाड़ियों को 20 किमी तक स्केट करना होगा। 2018 से पहले 2010 में ग्वांगझाऊ में हुए एशियन गेम्स में इसका आयोजन हुआ था।
सेपकटाकरा ही नहीं एशियन गेम्स में देखने लायक हैं ये 5 अजब-गजब खेल
5. कबड्डी

कबड्डी खेल का जन्मदाता भारत है। यही वजह है कि एशियन गेम्स में भारत ने 7 बार गोल्ड जीता। यह खेल दो टीमों के बीच खेला जाता है। प्रत्येक टीम में 12-12 खिलाड़ी होते हैं जिसमें से 7-7 खिलाड़ी ग्राउंड पर उतरते हैं। एक टीम से एक खिलाड़ी पाले के दूसरी तरफ जाकर रेड मारता है इसे 'रेडर' कहा जाता है। दूसरी टीम के खिलाड़ियों को इसे पकड़ना होता है। अगर रेडर विपक्षी टीम के किसी भी खिलाड़ी को छूकर वापस अपने पाले में आ जाता है तो विपक्षी टीम के उस खिलाड़ी को खेल से बाहर होना पड़ता है। इसी तरह बारी-बारी से दोनों टीमों के रेडर मैच आगे बढ़ाते हैं, अंत में जिस टीम के पास ज्यादा प्वॉइंट होते हैं उसे विनर घोषित कर दिया जाता।

जानें क्या है सेपकटाकरा, जिसमें भारत जीत लाया मेडल

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