- बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस पर कलेजा पत्थर किए लाशों का इंतजार करते रहे परिजन

- कुछ ने बनारस में ही किया अंतिम संस्कार तो कुछ घर ले गए पार्थिव शरीर

दर्द की इंतेहां क्या है.. इस सवाल का जवाब बुधवार को मिला बीएचयू के पोस्टमार्टम हाउस पर. एक के बाद एक 15 लाशें चीरघर के अंदर जाती रहीं. रात से ही रो-रोकर परिवार के लोगों की आंखें सूख चुकी थीं. चेहरे और कलेजे पत्थर कर वह एक-एक कर शवों के आने का इंतजार करते रहे. अपने परिवार के सदस्यों और जिगर के इन टुकड़ों को समेटकर वह घरों को रवाना होते गए.

बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस से गुजरने वाले ठिठक जा रहे थे. मंगलवार की शाम फ्लाईओवर का बीम गिरने की घटना से कोई अनजान नहीं था. पीडि़त परिवारों के चेहरे देखकर अपरिचितों की संवेदनाएं भी खुद उमड़ आ रही थीं. मगर 14 घंटे पहले हुए इस हादसे ने इन परिवारों को संज्ञा शून्य बना दिया था. इन्हें न संवेदनाएं भा रही थीं, न सांत्वनाओं का इनपर कोई असर हो रहा था.

एनडीआरएफ जवान की गयी जान

एनडीआरएफ वाराणसी में तैनात सिपाही भवानी शंकर, निवासी अलीगढ़, राममिलन चौहान निवासी मऊ और बृजेश शर्मा निवासी राजस्थान मंगलवार की शाम बीएचयू से ड्यूटी कर शाम को कैंप लौट रहे थे. तीनों उसी सिटी बस में सवार थे जिसके ऊपर बीम गिरा. भवानी और राममिलन की मौके पर ही मौत हो गई जबकि बृजेश गंभीर रूप से घायल है, उसका एक हाथ कट चुका है. पोस्टमार्टम हाउस पर राममिलन के रिश्तेदार रामफेर चौहान मौजूद थे. पूछने पर दर्द बयान करने लगे. उन्होंने बताया कि राममिलन परिवार का अकेला कमाऊ पूत था. एक बहन है, जिसकी शादी करने के बाद ही वह खुद की शादी करना चाहता था. पूरा परिवार बनारस पहुंचा था मगर अफसरों ने उन्हें कैंप में ही रोक लिया ताकि उन्हें सदमा न लगे. साथ आए एनडीआरएफ के जवान धर्मात्मा पाठक, रामनाथ प्रजापति, कलेक्टर आदि ने बताया कि राममिलन और भवानी बड़े ही जिम्मेदार थे. हर समय काम के लिए तैयार रहना और खाली समय में साथियों का मनोरंजन करते रहना इन्हें पसंद था. बताते हुए धर्मात्मा का गला भर आया.

पूरे परिवार पर गिरी मौत

फ्लाईओवर हादसा गाजीपुर के सहेड़ी गांव के एक परिवार पर कहर बनकर बरपा. पिता खुशहाल और दो पुत्रों शिवबचन और संजय की मौत हो गई. इनके साथ आया ड्राइवर वीरेंद्र भी असमय काल के गाल समा गया. पोस्टमार्टम हाउस पर इनके परिवार और आसपड़ोस के लोग मौजूद थे. पूरे परिवार की मौत के बाद इन्हें सिर्फ इस बात की फिक्र रह गई थी कि कैसे घर पहुंचे और इंतजार कर रही महिलाओं को क्या जवाब दें.

जौनपुर के सरायख्वाजा से महिला को अस्पताल दिखाने लाया परिवार भी इस हादसे की चपेट में आया. परिवार के लोग होनी को कोस रहे थे कि किस तरह इलाज के चक्कर में पूरे परिवार ने जान गंवा दी. इस हादसे में 50 वर्षीया विद्या देवी, उनके पति रघुनाथ और बेटा अरुण उर्फ सिकंदर की जान चली गयी.

पत्‍‌नी और बेटे को स्टेशन छोड़ने आ रहे औराई क्षेत्र के ¨सडिकेट बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत राम बहादुर सिंह (44 वर्ष) और उनके पुत्र कुमार वैभव (15 वर्ष) की मौत हो गई. परिवार के लोग एक तरफ बाप-बेटे के शव लेने को परेशान थे तो दूसरी तरफ वह ट्रामा सेंटर में भर्ती रामबहादुर सिंह की पत्‍‌नी कुमकुम सिंह की तीमारदारी में भी दौड़भाग रहे थे.

हादसे में मृतकों की सूची

. भवानी शंकर 35 वर्ष, एनडीआरएफ का जवान निवासी अलीगढ़

2. सुदर्शन राम 37 वर्ष, रमदत्तपुर कैंट

3. खुशीहाल राम 70 वर्ष, सहेड़ी नंदगंज गाजीपुर

4. संजय कुमार 37 वर्ष पुत्र खुशीहाल, सहेड़ी नंदगंज गाजीपुर

5. शिवबचन 45 वर्ष पुत्र खुशीहाल, सहेड़ी नंदगंज गाजीपुर

6. वीरेंद्र यादव 37 वर्ष, चालक, नंदगंज गाजीपुर

7. कुमार वैभव 15 वर्ष पुत्र रामबहादुर सिंह, रसूलपुर छपरा बिहार

8. रामबहादुर सिंह 46 वर्ष, रसूलपुर छपरा बिहार

9. राममिलन चौहान 28 वर्ष, एनडीआरएफ जवान, मऊ

10. रामचंद्र 32 वर्ष, खुटहन जौनपुर

11. विद्या देवी पत्‍‌नी रघुनाथ 45 वर्ष, सरायख्वाजा जौनपुर

12. रघुनाथ 52 वर्ष, सरायख्वाजा जौनपुर

13. अरुण उर्फ सिकंदर पुत्र रघुनाथ 25 वर्ष, सरायख्वाजा जौनपुर

14. भैरो नाथ, रुदौली बस्ती

15. रामचेत 48 वर्ष, खुटहन जौनपुर

घायलों की सूची

. महेंद्र प्रसाद 45 चहनिया चंदौली

2. राजेश भास्कर 40 वर्ष पुत्र दयाराम भास्कर, नक्खीघाट वाराणसी

3. नीरज 26 वर्ष पुत्र घनश्याम रामनगर

4. कुमकुम पत्‍‌नी 42 वर्ष पत्‍‌नी आरबी सिंह कंचनपुर डीएलडब्ल्यू

5. मो. इस्माइल 35 वर्ष बेनियाबाग चेतगंज

6. रविप्रकाश श्रीवास्तव 61 वर्ष रामनगर

7. सुमित मिश्रा 30 वर्ष भुल्लनपुर

8. नसरूद्दीन 25 वर्ष देवरिया

9. मो. शकील 30 वर्ष नक्खीघाट

10. डॉ. महेंद्र प्रसाद खरवार 49 वर्ष चहनिया

11. पदुमलाल केसरी 35 वर्ष मीरजापुर

12. सीताराम 65 वर्ष चंदुआ छित्तूपुर