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PATNA : फर्जी ई-चालान के माध्यम से बालू की ढुलाई की जा रही है. इस मामले में सबसे आश्चर्य की बात यह है कि इसकी शिकायत किसी और ने नहीं बल्कि खुद बालू बंदोबस्तधारियों ने विभाग की प्रधान सचिव से की है. दरअसल, 1 जुलाई से 30 सितंबर तक लगातार तीन महीने राज्य की सभी नदियों से बालू खनन पर प्रतिबंध रहने के बाद जब 1 अक्टूबर से राज्य में पुन: बालू का खनन शुरू किया गया तो विभाग ने सभी बालूघाटों को धर्मकांटा से जोड़ दिया.

बन रहा डुप्लीकेट चालान

इन सभी धर्मकांटों की मॉनिट¨रग विभाग द्वारा ऑनलाइन की जा रही है. साथ ही अब बालू की ढुलाई के लिए इन्हीं धर्मकांटों से ई-चालान निर्गत किए जा रहे हैं. लेकिन बालू माफिया ने धर्मकांटा से जारी ई-चालान को स्कैन करके डुप्लीकेट चालान से बालू की ढुलाई शुरू कर दी है. इससे एक तरफ विभाग को राजस्व का घाटा तो हो ही रहा है साथ ही कई स्थानों से बालू का अवैध खनन भी किया जा रहा है. विभाग की प्रधान सचिव अंशुली आर्या को जब इसका पता चला तो उन्होंने विभागीय पदाधिकारियों को इस मामले में तत्काल में कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

होलोग्राम की व्यवस्था नहीं

दरअसल, धर्मकांटों से बालू की ढुलाई के लिए जो ई-चालान जारी किए जाते हैं उसमें होलोग्राम की व्यवस्था नहीं है. बालू बंदोबस्तधारियों ने विभाग की प्रधान सचिव से मांग की है कि ई-चालान की हार्डकॉपी पर

होलोग्राम लगाने की व्यवस्था की जाए. ताकि ई-चालान में हो रहे फर्जीवाड़े को रोका जा सके. 3 माह तक

एनजीटी के प्रावधानों के तहत राज्य में बालू खनन पर प्रतिबंध रहने के बाद विगत 1 अक्टूबर से खनन शुरू किया गया था.