छ्वन्रूस्॥श्वष्ठक्कक्त्र: स्टील सिटी में फुटबाल खिलाडि़यों के लिए अच्छी और सस्ती कोचिंग के चलते शहर के युवाओं को देर से ही सही लेकिन यह खेल भाने लगा है. इसका अंदाजा इसी बात से ही लगाया जा सकता है कि इस वर्ष जेआरडी काम्पलेक्स होने वाले समर कैंप में दो गुने खिलाडि़यों ने भाग लिया. पूर्व फीफा व‌र्ल्ड कप के कोच विनोद कुमार ने बताया कि इस बार कुल 600 बच्चों ने समर कैंप में ट्रेनिंग ली. उन्होंने बताया कि जेएसए और आईसीएल से शहर के युवाओं में फुटबाल के प्रति सार्थक रवैया अपनाना शुरू किया है. खिलाडि़यों के साथ ही माता-पिता भी फुटबाल पर रुझान ले रहे है. शहर में बच्चों का रुझान देकर माता पिता बच्चों को ट्रेनिंग सेंटरों में भेजकर ट्रेनिंग करा रहे हैं.

तीन सालों में बढ़ा क्रेज

शहर में फुटबाल का क्रेज पिछले सालों की तुलना में और बढ़ा है. शहर में जेएसए की स्थापना के साथ ही शहर में फुटबाल के बीच बो दिए गए थे लेकिन दो से तीन सालों में खिलाडि़यों के रुझान और आइ्रसीएल जैसे खेलों में जमशेदपुर की सहभागिता ने शहर में फुटबाल का क्रेज को बढ़ाया है. फुटबाल में शहर के आदिवासी युवा तो भाग ले रहे है लेकिन अभी भी शहर का उच्च वर्ग अछूता रह गया है.

बनना होगा प्रोफेशनल

शहर में लंबे समय से जीएसए लीग खेल रहे खिलाडि़यों को प्रोफेशनल की तरह खेलने की जरूरत है. टाटा स्टील फुटबाल एकदमी के कोच अशोक टुडू ने कहा कि खिलाडि़यों को अपने को अंतराष्ट्रीय खेलों के एि तैयार करना होगा. उन्होंने बताया कि अब खेल पुराने तौर तरीके से नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय मानकों के अनुसार चलते है. इस लिए खिलाडि़यों को सभी नियम कानूनों के साथ ही प्रोफेशनल खिलाड़ी बनाना होगा.

बेटे का मन फुटबाल की कोचिंग करने का था जिसको देखते हुए हमने उसे अर्मरी ग्राउंड भेजना शुरू कर दिया है. अगर बच्चे इस खेल में अच्छा करते है तो हमारे लिए और जमशेदपुर दोनों के लिए यह फक्र की बात होगी.

नीत पांडेय, मानगो

बेटा दो सालों से फुटबाल की ट्रेनिंग के लिए कह रहा है. इस वर्ष उसे एग्रिको मैदान में भर्ती कराया दिया है. शहर में फुटबाल का क्रेज बढ़ा है. हम लोगों के जमाने में तो खेलना कूदना खराब माना जाता था लेकिन अभी विभिन्न खेलों में बच्चे बेस्ट कर रहे है.

सुरेश कुमार, कदमा