JAMSHEDPUR: स्टील सिटी में सीबीएसई और आईसीएससी स्कूलों से फुटबॉल प्लेयर्स निकलकर नहीं आ रहे हैं. फीफा के पूर्व कोच विनोद सिंह ने दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के साथ विशेष बातचीत में बताया कि शहर में मोहन बगान की तरह फुटबाल एकादमी बनने से शहर व‌र्ल्ड क्लास के प्लेयर दे पाएगा. टाटा स्टील के फुटबाल के कोच जगन्नाथ ने बताया कि धीरे-धीरे स्कूलों से भी प्लेयर्स निकल कर आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि फुटबॉल दुनिया का सबसे रोमांचक खेल होने के साथ ही जमशेदपुर का भी सबसे फेवरिट गेम है. इसका ताजा उदाहरण आईसीएल में शहर ने देख लिया है. यह सच है कि अगर सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों के बच्चे फुटबाल में विशेष रुचि लेते हैं, तो जल्द ही हम कई इंटरनेशनल लेबल के खिलाड़ी देश को दे पाएंगे.

उच्च वर्ग की सहभागिता जरूरी

शहर में सीबीएसई और आईसीएसई की शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राएं अमीर घरों से आते है. जिससे वह आगे की तैयारी कर सकते है. शहर में उच्चवर्ग के लोगों का फुटबाल में आने से हम नेशनल लेबल पर अच्छा कर पाएंगे. शहर में दो से तीन सालों में फुटबाल के प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ी है. शहर में युवा खिलाडि़यों के साथ ही उनके माता-पिता भी खेल के महत्व को समझ रहे है.

नाम रोशन कर रहे इंटरनेशनल प्लेयर

शहर में टीएफए से ट्रेनिंग लेकर निकले भारतीय टीम के गोलकीपर सुब्रतो पाल देश का चेहरा बन चुके हैं. सुब्रतो को उनके अच्छे खेल के लिए अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा गया है. सुब्रतो जमशेदपुर एफसी टीम के लिए भी विकेट कीपर की भूमिका निभाते हैं. वहीं मणिपुर के कुमन उदांता सिंह ने टीएफए जमशेदपुर से ट्रेनिंग लेकर नेशनल गेम 2011 और एशिया कप में नेशनल टीम के लिए खेल चुके हैं. इस समय उदांता बंगालुरु टीम के लिए खेलते हैं. शहर के सबसे पहले नेशनल प्लेयर के रूप में पी विजय कुमार ने जमशेदपुर को नेशनल पटल पर लाने का काम किया. सन 1984 में भारतीय टीम में शामिल होकर देश का गौरव बने पी विजय अपने देहांत तक 2015 तक नेशनल टीम का हिस्सा रहे.