- इस वर्ष अब तक दो दर्जन से अधिक घटनाएं आ चुकी हैं सामने

- एफएसआई के कॉर्डिनेशन से जीआईएस की ली जाएगी हेल्प, कार्मिकों की छुट्टियां कैंसल

>DEHRADUN: फॉरेस्ट फायर सीजन 15 फरवरी से शुरू हो चुका है। हर साल राज्य में आग के कारण खाक होने वाले जंगलों में आग पर काबू पाने के लिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने इस बार कमर कस ली है। खास बात यह है कि डिपार्टमेंट ने सभी कार्मिकों की छुट्टियां कैंसल करने के साथ ही सभी डिविजनों को भी अलर्ट कर दिया है। जबकि डिपार्टमेंट के हेडक्वार्टर पर एक कंट्रोल रूम गठित किया है। जिसका नंबर 18001804141 फ्लैश किया गया है।

कंट्रोल रूम्स हुए एक्टिव

फॉरेस्ट फायर सीजन की जानकारी देते हुए प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने बताया कि फॉरेस्ट फायर सीजन को देखते हुए तकरीबन 10 हजार कर्मचारियों की व्यवस्था डिपार्टमेंट ने सुनिश्चित की है। जबकि अधिकारियों को फील्ड में तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे ही फॉरेस्ट फायर पर कंट्रोल पाने के लिए आम लोगों को अवेयर किया जा रहा है। हालांकि वेडनसडे को दून सहित राज्य के कई हिस्सों में हल्की बारिश के कारण डिपार्टमेंट ने राहत की सांस ली है। वहीं फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने जीआईएस (जियोग्राफिकल इन्फोर्मेशन सिस्टमम) व सेटेलाइट इमेजेज के जरिए फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के साथ कॉर्डिनेशन शुरू कर दिया है। बताया गया है कि इस वर्ष डिपार्टमेंट गत वर्ष की तरह फायर की कई वायरल हुई फोटोग्राफ पर भी नजर रखी जा रही है। सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरों पर कंट्रोल किया जाएगा। स्टेट फॉरेस्ट डिपार्टमेंट फॉरेस्ट फायर सीजन 15 फरवरी से 15 जून तक मानता है। यही वजह है कि इस वर्ष भी जंगलों में कई आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। डिपार्टमेंट के पास अब तक करीब दो दर्जन से अधिक घटनाएं सामने आने का जिक्र किया है। जिसमें रिजर्व फॉरेस्ट का 30.65 हेक्टेयर व सिविल फॉरेस्ट का 5 हेक्टेयर जंगल के जल जाने के साथ ही 6 जानवर व 43 हजार से ज्यादा के नुकसान की सूचना डिपार्टमेंट के पास है। वहीं विभाग के पास 15-20 करोड़ रुपए का सालाना अनुमानित बजट प्रस्तावित रहता है।

- वर्ष 2014 में 515 फॉरेस्ट फायर के मामले आए सामने।

- इसमें 930.33 हेक्टेयर फॉरेस्ट जलकर राख हुई, 23 लाख से ज्यादा का नुकसान।

- 2015 में 412 घटनाएं आई सामने, 701.61 हेक्टेयर जंगल जलकर राख, 7.94 लाख का नुकसान अनुमानित।

- 2016 में 2074 आग के मामले आए सामने, 4433.75 हेक्टेयर जंगल राख, 46.50 लाख के नुकसान का आंकलन।

-2017 में 805 आग की घटनाएं आई सामने, 1244.64 हेक्टेयर जलकर राख, 18 लाख से ज्यादा का नुकसान।

- 2018 में 2150 आग की घटनाएं आई सामने, 4480.04 हेक्टेयर जंगल जलकर राख, 86 लाख से अधिक के नुकसान का अनुमान।

- 2019 में अब तक 24 आग की घटनाएं आई सामने, 34 हजार से अधिक के नुकसान का अनुमान।

दून िजले में भी अलर्ट, 135 क्रू स्टेशन बने

दून जिले में कई डिविजन शामिल किए गए हैं। मसूरी, दून, चकराता व कालसी को शामिल किया गया है। जिनके नोडल अधिकारी डीएफओ दून राजीव धीमान को बनाया गया है। डीएफओ दून के अनुसार दून जिले में 135 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। फॉरेस्ट फायर की घटनाओं को रोकने लिए कंट्रोल बर्निग यानी सड़कों किनारे पत्तों का जलाया जा रहा है। फरवरी में बारिश होने के कारण जो संभव नहीं हो पाया था। उन्होंने बताया कि गोष्ठियों, कठपुलियों की हेल्प ली जा रही है। अपरिहार्य कारणों के अलावा छुट्टियां कैंसल कर दी गई हैं। वहीं जिला प्रशासन व फायर सर्विस का भी पूरा सपोर्ट मिल रहा है।