बेली में 10 बजे सुबह से शाम 4 बजे तक लगी रही लंबी लाइन

PRAYAGRAJ: यूं तो बेली में मरीजों की कतार हर रोज ही लगती है, लेकिन बुधवार को यहां का नजारा थोड़ा अलग था। विदेशों से आए डॉक्टर्स मरीजों को देख रहे थे। अमेरिका, इंग्लैंड के अलावा एम्स से आए डॉक्टर्स ने 325 मरीजों को देखा।

सुबह से शाम तक लगी रही लाइन

कमरा नंबर चार, पांच, सात, दस और 26 में बुधवार को सुबह दस से दोपहर 4 बजे तक मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। इन कमरों में अमेरिका से आए न्यूरोलॉजिस्ट डॉ। संजय प्रताप सिंह, प्राइमरी केयर मेडिसिन के डॉ। शैलेंद्र सक्सेना और फैमिली मेडिसिन के डॉ। कवीश रोहतगी, इंग्लैंड के डॉ। सौरभ राय ने मरीजों को देखा। इसके अलावा एम्स नई दिल्ली की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ। ममता भूषण सिंह भी उपस्थित रहीं। इन्होंने न्यूरोलाजी सहित डायबिटीज, हार्ट, बीपी और मिर्गी के मरीजों का इलाज किया।

हर 50 सेकंड में एक लकवे का शिकार

अमेरिका से आए न्यूरोलाजिस्ट डॉ। संजय प्रताप सिंह ने बताया कि देश में प्रत्येक 10 सेकंड में एक व्यक्ति लकवे का शिकार होता है। यूपी में यह रेशियो 50 सेकंड का है। उन्होंने बताया कि देश में न्यूरो के इतने अधिक मरीजों के बावजूद गिनती के डॉक्टर हैं और वह भी साउथ और वेस्ट इंडिया में अधिक हैं। इसीलिए यूपी के हमीरपुर, प्रयागराज, गोरखपुर और मथुरा में मरीजों को देखने के लिए विदेशों से डॉक्टर्स बुलाए गए हैं।

आज भी देखेंगे डॉक्टर्स

गुरुवार को भी विदेशी डॉक्टर्स बेली में मरीजों को देखेंगे।

गुरुवार को कार्डियो वैस्कुलर सर्जन डॉ। महेश अल्ना भी यहां मौजूद रहेंगे।

शुक्रवार को लोकल डॉक्टर्स को अपडेट किया जाएगा और ट्रेनिंग होगी।

2000 न्यूरोलॉजिस्ट पर बड़ी जिम्मेदारी

पूरे देश में कुल 2000 न्यूरोलाजिस्ट हैं और इन पर केवल 1.5 करोड़ मिर्गी के मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी है। अन्य बीमारियों के मरीजों की संख्या इससे अधिक होगी।

खास करार के तहत आए

प्रदेश सरकार ने विदेश में रह रहे भारतीय मूल के डॉक्टर्स से विभिन्न शहरों में मरीजों को देखने का करार किया है। इसके तहत बुधवार को पांच विदेशी डॉक्टर्स ने मरीजों को परामर्श दिया।