कानपुर। भारत की तरफ से 10 इंटरनेशनल मैच खेल चुके दाएं हाथ के ओपनर बल्लेबाज एस बद्रीनाथ ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। क्रिकइन्फो के डेटा के मुताबिक, वनडे में 79 और टेस्ट में कुल 63 रन बनाने वाले बद्रीनाथ को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ी पहचान नहीं मिल पाई। हालांकि फर्स्ट क्लॉस क्रिकेट में उन्होंने 54.49 की औसत से 10 हजार से ज्यादा रन बनाए हैं। वह तमिलनाडु की टीम से खेलते थे। हालांकि आईपीएल में वह चेन्नई सुपर किंग्स और आरसीबी के लिए खेल चुके हैं। बद्रीनाथ सबसे ज्यादा चर्चित तब हुए जब 10 साल पहले उनका कंप्टीशन विराट कोहली से हुआ।

धोनी की पसंद कोई और था
इस बात का जिक्र भारत के पूर्व कप्‍तान और चीफ सेलेक्‍टर रहे दिलीप वेंगसरकर ने कुछ समय पहले किया था। दिलीप का कहना था कि, साल 2008 में जब कोहली को टीम में लाने की बात चली तो उस पर काफी विवाद हुआ। वेंगसरकर उस वक्‍त खिलाड़ियों का चयन किया करते थे। उन्‍होंन विराट को अंडर-19 वर्ल्‍ड कप 2008 में खेलते देखा था और वह काफी प्रभावित भी हुए। उसी साल भारतीय टीम श्रीलंका दौरे पर जा रही थी। उस टीम में सचिन तेंदुलकर नहीं थे, ऐसे में एक बल्‍लेबाज को उनकी जगह खिलाना था। तब वेंगसरकर ने कोहली के नाम का सुझाव दिया। मगर तत्‍कालीन कप्‍तान एमएस धोनी और कोच गैरी कर्स्‍टन कोहली की जगह एस बद्रीनाथ को टीम में रखना चाहते थे।

कोहली को नहीं चाहते थे टीम में
सिर्फ धोनी ही नहीं उस वक्‍त बीसीसीआई के कोषाध्‍यक्ष रहे श्रीनिवासन भी बद्रीनाथ के पक्ष में थे। दरअसल बद्रीनाथ तमिलनाडु के लिए खेला करते थे और श्रीनिवासन तमिलनाडु क्रिकेट संघ के अध्‍यक्ष थे। इसके अलावा धोनी और बद्रीनाथ आईपीएल में एक साथ चेन्‍नई सुपर किंग्‍स से खेलते थे। ऐसे में बद्रीनाथ सभी की पहली पसंद थे। मगर वेंगसरकर की सुई कोहली पर अटकी थी। उन्‍होंने विराट को अच्‍छी बल्‍लेबाजी करते देखा था।

वेंगसरकर को गंवानी पड़ी थी कुर्सी
तमाम वाद-विवाद के बाद आखिरकार वेंगसरकर ने विराट को भारतीय टीम में शामिल कर लिया। यह बात एन श्रीनिवासन को रास नहीं आई। इसके बाद श्रीनिवासन ने तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार से इसकी शिकायत कर दी। इसके अगले ही दिन वेंगसरकर को चयन समिति के चेयरमैन पद से हटा दिया गया, लेकिन वह विराट कोहली को टीम में जरूर ले आए।

कोहली से हार गए बद्रीनाथ
हालांकि श्रीलंका के खिलाफ पहला मैच खेलने के बाद विराट को ड्रॉप करके अगले मैच में बद्रीनाथ को टीम में रखा गया। मगर वह भी कुछ खास कमाल नहीं कर सके। इसके बाद धीरे-धीरे विराट मौकों को भुनाते चले गए और आज एक बड़े खिलाड़ी बन गए वहीं बद्रीनाथ इस कंप्टीशन में पिछड़ गए और दो वनडे मैच खेलकर ही टीम से बाहर हो गए। खैर अब 38 साल के हो चुके बद्रीनाथ अपना पूरा समय परिवार के साथ बिताना चाहते हैं इसलिए उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया।

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