क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : रिम्स में मरीज की मौत के बाद शव को ले जाने के लिए परिजनों को एंबुलेंस अथवा शव वाहन के लिए न तो इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही प्राइवेट एंबुलेंस वालों की मनमानी झेलनी होगी. स्वास्थ्य विभाग ने रिम्स को चार नए शव वाहन देने का फैसला किया है. ये शव वाहन जरूरतमंदों को सरकारी दर पर उपलब्ध होगा. हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ बीएल शेरवाल ने बताया कि यहां इलाज के लिए आए मरीज की अगर मौत हो जाती है तो शव ले जाने के लिए अभी मात्र एक ही शव वाहन उपलब्ध है. ऐसे में मृतक के परिजनों को मजबूरी में प्राइवेट शव वाहन या एंबुलेंस लेनी पड़ती है. लेकिन, चार नए शव वाहन मिलने से शव ले जाने के लिए परिजनों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.

7 रुपए प्रति किमी है चार्ज

डायरेक्टर डॉ बीएल शेरवाल ने बताया कि रिम्स में एंबुलेंस या शव वाहन की दर सात रुपए प्रति किमी है. नए शव वाहन भी इस दर पर उपलब्ध कराए जाएंगे. उन्होंने बताया कि लावारिस और बिरहोर व आदिम जनजाति के किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके शव के लिए एंबुलेंस अथवा शव वाहन मुफ्त में उपलब्ध कराए जाते हैं.

हर दिन दो दर्जन से ज्यादा की होती है मौत

रिम्स में पूरे राज्य से हर दिन सैकड़ों मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं. इनमें हर तरह के मरीज होते हैं. इलाज के दौरान यहां हर दिन करीब दो दर्जन लोगों की मौत हो जाती है. लेकिन, इन शवों को भेजने के लिए अभी हॉस्पिटल मैनेजमेंट के पास मात एक शव वाहन है, जिस कारण मृतक के परिजनों को प्राइवेट एंबुलेंस सर्विस पर निर्भर रहना होता है.

प्राइवेट एंबुलेंस वाले लेते हे मनमाना पैसा

रिम्स में मात्र एक सरकारी शव वाहन उपलब्ध है. ऐसे में अगर किसी मरीज की मौत लो जाती है तो उसके परिजन शव को ले जाने के लिए प्राइवेट एंबुलेंस वालों की सेवा लेते हैं. लेकिन, ये इसके एवज में मनमाना चार्ज वसूलते हैं. एक-एक बॉडी ले जाने के लिए 5-10 हजार रुपए तक की वे वसूली करते हैं. इतना ही नहीं, यहां कई दलाल भी एक्टिव हैं, जो वार्डो में चक्कर लगाते रहते हैं. जैसे ही उन्हें किसी मरीज की मौत की जानकारी मिलती है, वे उसके परिजनों को अपने जाल में फंसान के लिए उसके इर्द-गिर्द चक्कर लगाने लगते हैं और प्राइवेट एंबुलेंस उपलब्ध कराकर कमीशन खाते हैं.