मोरारजी देसाई
मोरारजी देसाई ऐसे पहले व्‍यक्‍त‍ि थे जिन्‍होंने पहले वित्‍त मंत्री व बाद में देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला। उनके नाम एक अनोखा रिकार्ड भी है। उन्‍होंने वित्‍त मंत्री रहते हुए सर्वाधिक 10 बार भारत का बजट पेश किया है। इतना ही नहीं दो मौकों पर तो उन्‍होंने अपने जन्‍मदिन 29 फरवरी को बजट पेश किया। उन्‍होंने आजादी की लड़ाई के दौरान लंबा समय जेल में बिताया । अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान आजादी से पहले उन्‍होंने बांबे प्रेसिडेंसी के वित्‍त व गृह मंत्री का पद संभाला। 1952 में वह तत्‍कालीन बांबे राज्‍य के मुख्‍यमंत्री बने। वह पहली बार प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में 1958 में वित्‍त मंत्री बने। इसके बाद 1967  में बतौर डिप्‍टी पीएम व वित्‍त मंत्री की हैसियत से इंदिरा गांधी की कैबिनेट का हिस्‍सा बने। इमरजेंसी खत्‍म होने के बाद 1977 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी की भारी मतों से जीत हुई। उन्‍हें संसदीय दल का नेता चुना गया व उन्‍होंने देश के पहली गैर कांग्रेसी सरकार में प्रधानमंत्री का पद संभाला। वह देश के चौथे पीएम बने।   
आम बजट 2018: चार भारतीय वित्त मंत्री जो बाद में बने प्रधानमंत्री
चौधरी चरण सिंह
इनका जन्म 1902 वर्तमान हापुड़ जिले के नूरपुर गांव में हुआ। मोरारजी देसाई के नेतृत्‍व वाली जनता पार्टी की सरकार में जनवरी 1979 में उन्‍होंने वित्‍त मंत्री का पद संभाला। हालांकि उनका कार्यकाल लंबा नहीं रहा। इस सरकार में वह डिप्‍टी पीएम व गृह मंत्री के पद पर भी रहे। बाद में वह देश के पांचवें पीएम बने। इनका कार्यकाल 28 जुलाई से 14 जनवरी 1980 तक रहा। राष्ट्रपिता महात्‍मा गांधी से प्रभावित होकर वह भारत की आजादी की लड़ाई का हिस्‍सा बने। वह उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री भी रहे।
आम बजट 2018: चार भारतीय वित्त मंत्री जो बाद में बने प्रधानमंत्री
विश्वनाथ प्रताप सिंह
विश्‍वनाथ प्रताप सिंह ने राजीव गांधी की सरकार में दिसम्‍बर 1984 से लेकर जनवरी 1989 तक वित्‍त मंत्री का पद संभाला। बाद में उन्‍होंने भारत के सातवें प्रधानमंत्री के रुप में शपथ देश ली। उन्‍होंने 2 दिसम्‍बर 1989 से लेकर 10 नवम्‍बर 1990 राष्‍ट्रीय मोर्चा की सरकार का नेतृत्‍व किया। वित्तमंत्री के पद पर रहते हुए सोने की स्‍मगलिंग पर लगाम लगाने के लिए सोने पर लगने वाला टैक्स कम कर दिया। वह केंद्र में रक्षा मंत्री व उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री भी रहे।
आम बजट 2018: चार भारतीय वित्त मंत्री जो बाद में बने प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह
वित्‍त मंत्री के तौर पर मनमोहन सिंह को भारत को आर्थिक संकट से बाहर निकालने का श्रेय दिया जाता है। पीवी नरसिंह राव की सरकार में 21 जून 1991 को वित्‍त मंत्री का पद संभाला था। इस पद पर वह 16 मई 1996 तक रहे। इस दौरान उन्‍होंने बड़े पैमाने पर आर्थिक सुधार किए। वह ऐसे चौथे व्‍यक्‍त‍ि हैं जिन्‍होंने वित्‍त मंत्री रहने के बाद भारत के प्रधानमंत्री का पद संभाला। इतना ही नहीं वह जवाहर लाल नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री भी हैं जिन्‍हें अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद अगले पांच साल के लिए भी जनता ने चुना। वह 22 मई 2004 से 26 मई 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। इनका जन्म 26 सितंबर 1932 को गह में हुआ जो अब पाकिस्‍तान में है।
आम बजट 2018: चार भारतीय वित्त मंत्री जो बाद में बने प्रधानमंत्री

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