- मुख्य थानेदार के साथ तैनात होंगे तीन और प्रभारी

- प्रशासनिक, लॉ एंड ऑर्डर और क्राइम की होगी अलग-अलग होगी जिम्मेदारी

- सर्किल मुख्यालय वाले थानों पर तैनाती, डीजीपी ने दिया आदेश

कभी अपराधियों की धरपकड़, कभी धरना-प्रदर्शन या सांप्रदायिक तनाव को शांत कराना, कभी वीआईपी ड्यूटी तो कभी पड़ोसी थानों की मदद, मुकदमों की पैरवी और कोर्ट संबंधी मामलों का ध्यान. इनके अलावा भी अफसरों के आदेश का पालन और मातहतों का पूरा ख्याल रखना. थाने के संसाधनों का रखरखाव और कम संसाधनों और फोर्स का भी बेहतर मैनेजमेंट. यह कुछ मुख्य काम हैं जो एक थाने पर तैनात थानेदार को करने होते हैं. जाहिर है, इतना बोझ किसी भी स्वस्थ आदमी को तनाव दे दे. यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने इन्हीं दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश भर में एक थाने पर थानेदार के साथ तीन सहयोगी थाना प्रभारियों को पोस्ट करने का आदेश दिया है. इसका मतलब है कि अब हर थाने की जिम्मेदारी चार थाना प्रभारियों पर होगी.

यह होंगी जिम्मेदारियां

डीजीपी की तरफ से जारी सर्कुलर के मुताबिक हर थाने पर अब एक भारसाधक अधिकारी के बाद तीन और थानेदार होंगे. इनके नाम इंस्पेक्टर प्रशासन, इंस्पेक्टर लॉ एंड ऑर्डर और इंस्पेक्टर क्राइम होंगे. नाम के लिहाज से ही इनकी जिम्मेदारियां भी अलग-अलग रहेंगी. मगर सभी के काम की निगरानी का जिम्मा मुख्य प्रभारी निरीक्षक का ही होता है. सर्कुलर के मुताबिक, चार थानेदारों की तैनाती अभी सर्किल मुख्यालय वाले थानों पर की जाएगी. 1400 थानों वाले यूपी में कुल 414 थाने सर्किल मुख्यालय के हैं. अगले चरण में शेष थानों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा.

इसलिए पड़ी जरूरत

यूपी पुलिस में विवेचना और लॉ एंड ऑर्डर की फोर्स अलग करने की कवायद बरसों से चल रही है. मगर कर्मचारियों की कमी के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा था. साल-2012 में मेरठ और वाराणसी में यह प्रयोग भी किया गया मगर काम के बोझ के चलते यह सफल नहीं हो सका. यूपी पुलिस में फिलहाल तेजी से प्रमोशन शुरू हुए हैं. पिछले दो साल में चार हजार से ज्यादा दरोगा पदोन्नत होकर इंस्पेक्टर हो गए. इनके अनुभव के बेहतर इस्तेमाल और वरिष्ठता के लिहाज से इन्हें पोस्टिंग देने के लिए यह व्यवस्था की गई है.