जानें साई बाबा की चार बातें,बदल जाएगी आपकी किस्‍मत
प्रेम : ढाई आखर प्रेम का पढ़े जो पंडित होय

साईं बाबा सभी को समान रूप से प्रेम करते थे। उनके भक्‍तों में हिंदू भी तो मुसलमान भी मुरीद थे। वे जानवरों से भी उतना ही प्रेम करते थे। कबीर दास से साईं बाबा तक सबने प्रेम को जीवन में सर्वोच्‍च स्‍थान दिया है। जब व्‍यक्ति किसी से प्रेम ही नहीं कर सकता तो इस दुनिया में जीवन ही नर्क हो जाएगा। ईश्‍वर ने हम सभी जीव-जंतुओं को बनाया है। फिर ईश्‍वर की बनाई किसी चीज से घृणा क्‍यों? यह बात समझते तो सब हैं लेकिन जीवन में इन पर अमल बहुत कम लोग करते हैं। इस बात पर अमल किया जाए तो वाकई दुनिया बहुत सुंदर हो जाएगी। संसार से दुख, दर्द, घृणा, क्‍लेश आदि सब खत्‍म हो जाएगा और लोगों का जीवन खुशहाल हो जाएगा।
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क्षमा : क्षमा बड़न को शोभत, छोटन को उत्‍पात
साईं बाबा कभी किसी से दुश्‍मनी नहीं पालते थे। यहां तक कि शिरडी में जब उनका कुछ पंडितों ने विरोध किया तो उन्‍होंने उन्‍हें क्षमा कर दिया। कभी उनसे विवाद नहीं मोल लिया। किसी की गलती को क्षमा कर देना बड़प्‍पन की निशानी माना गया है। छोटी-मोटी गलतियों को नजरअंदाज कर देने से जीवन में जो समय हम वाद-विवाद में उलझ कर व्‍यर्थ में बर्बाद कर देते हैं वह बचेगा। यह समय हम अपने और दुनिया के विकास में लगा सकते हैं। कई बार तो लोग अपनी झूठी शान के चक्‍कर में छोटी-मोटी बातों को लेकर सालों मुकदमेबाजी करते हैं। 30-40 साल बाद जब फैसला आता है तो पछताते हैं कि अपने जीवन के मूल्‍यवान समय को हमने ऐसे ही गंवा दिया। इससे तो अच्‍छा था कि हमने शुरू में ही उन गलतियों को नजरअंदाज कर दिया होता तो धन और समय की बचत होती।
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मदद : कर मदद हो भला
कहा जाता है कि साईं बाबा के पास उनके गुरु का दिया हुआ एक बटुटा था जिससे वे लोगों की मदद किया करते थे। उनके दरबार में जो भी आता था वे उसे उस बटुए से सोने की मोहरें निकाल कर दे देते थे। पर्स कभी खाली नहीं होता था, और उनके दरबार से कभी किसी फरियादी की झोली खाली नहीं जाती थी। यहां तक कि एक अंग्रेज ने उनके पर्स की जांच तक के आदेश दिए थे। मदद करने से ही दुनिया चलती है। सभी एकदूसरे की मदद करें तो समाज सुगम रूप से आगे बढ़ता है। यदि संचय करके रखें तो दिक्‍कत शुरू होती है। इसलिए जरूरी है कि अपनी जरूरत के अलावा बाकी बचा हुआ जरूरतमंद लोगों में बांट दें ताकि दुनिया में कोई भूखा ना सोए, बिना कपड़ों के न रहे, बाहर ठंड से न मरे।
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सेवा : सेवा अस्‍माकं धर्म
साईं बाबा के बारे में कहा जाता है कि वे सेवा करने में कभी पीछे नहीं रहते थे। उनसे जो बन पड़ता था वे सेवा करते थे और भक्‍तों को सेवा के लिए प्रेरित करते थे। उस समय तमाम आपदाओं के वक्‍त साईं बाबा ने अपने भक्‍तों के साथ श्रमदान किया और लोगों की सेवा की। उनकी सेवा से ठीक हुए लोगों की बात कालांतर में भक्‍तों के बीच चमत्‍कार के रूप में प्रचलित हो गए। असल में वे सब उनकी सेवा का फल था। वे सदैव भक्‍तों को सेवा के लिए न सिर्फ उपदेश देते थे बल्कि सेवा करके उदाहरण भी देते थे।

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