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LUCKNOW : 'पद की गरिमा का ख्याल है, इसलिए राजनैतिक आरोपों का जवाब नहीं दूंगा, नहीं तो जवाब मैं भी दे सकता हूं।' पूर्व सीएम अखिलेश यादव के उनके भीतर आरएसएस की आत्मा वाले बयान पर यह कहना है राज्यपाल राम नाईक का। वे राज्यपाल के रूप में चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर रविवार को मीडिया से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का पद संभाला था तो उनका लक्ष्य प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाना था लेकिन, केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से आज उत्तर प्रदेश सर्वोत्तम प्रदेश बनने की राह पर है। राज्यपाल ने कहा कि जिस तरह निवेशकों ने निवेश के लिए जिस तरह का उत्साह दिखाया है, वह प्रदेश में कानून-व्यवस्था के सुधरने की ओर इशारा करता है। हालांकि इसमें अब भी सुधार की गुंजाइश है।

छात्र संघ चुनाव का समर्थन
राज्यपाल से सवाल किया गया था कि कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश और योगी सरकारों के कार्यकाल में उनका रवैया अलग-अलग रहा है। नाईक ने जवाब दिया कि व्यक्तिगत तौर पर उनके अखिलेश और योगी दोनों से ही मधुर संबंध रहे हैं। अखिलेश सरकार के कार्यकाल में ऐसी घटनाएं ज्यादा घटीं तो उन्होंने संविधान के अनुसार काम किया और कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। फिर कहा कि अब अगर ऐसी घटनाएं कम हुई हैं तो आपको अच्छा लगना चाहिए। यह भी जोड़ा कि कानून व्यवस्था में सुधार की जरूरत तो अब भी है। उन्होंने कहा कि वे अपने काम से संतुष्ट हैं और इसका आनंद ले रहे हैं। एक सवाल के जवाब में राज्यपाल नाईक ने कहा कि वे प्रदेश के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव के पक्ष में हैं लेकिन, अभी एडमिशन प्रक्रिया खत्म होकर पढ़ाई तो शुरू हो।

अखिलेश से ज्यादा योगी को लिखे पत्र
राज्यपाल ने अपने कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने पर कार्यवृत्त 'राजभवन में राम नाईक 2017-18 जारी किया। इसमें बताया गया है कि राज्यपाल के तौर पर उन्होंने सीएम को वर्ष 2017-18 में सबसे ज्यादा 450 पत्र लिखे। यह सीएम योगी आदित्यनाथ का कार्यकाल है। वहीं इससे पहले वर्षों यानि 2016-17 में उन्होंने मुख्यमंत्री को 326, 2015-16 में 398 और 2014-15 में 120 पत्र लिखे। यह तीन वर्ष अखिलेश यादव के कार्यकाल के हैं। राज्यपाल ने कहा कि इस संख्या से जाहिर होता है कि वे संविधान के मुताबिक ही काम करते हैं। कहा कि उन्हें खुशी है कि कार्यकाल के पहले दिन उन्होंने कहा था कि राजभवन के दरवाजे आम लोगों के लिये खुले हैं, इस पर पूरी तरह अमल हुआ और वे अब तक 24 हजार 968 आम नागरिकों से मुलाकात कर चुके हैं।
 
11 साल बाद पढ़ा गया पूरा भाषण
राज्यपाल नाईक ने कहा कि इस साल आठ फरवरी को राज्य विधानमंडल के प्रथम सत्र के संयुक्त अधिवेशन में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के बावजूद उन्होंने 38 पन्नों का अपना पूरा अभिभाषण पढ़ा। यह एक उपलब्धि है, क्योंकि वर्ष 2007 के बाद कभी भी राज्यपाल अपना पूरा अभिभाषण नहीं पढ़ सके थे और हंगामे के चलते प्रस्तावना पढ़कर इसे सदन के टेबल कर दिया जाता था।

सीएम ने की राज्यपाल से मुलाकात
सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल राम नाईक से भेंट की और चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें बधाई दी। 22 जुलाई, 2017 से 22 जुलाई 2018 तक योगी की राज्यपाल से यह 23वीं मुलाकात थी।

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