-टीडीआर के माध्यम से 1 लाख रुपए का किया था यूपी एग्रोटेक में निवेश

-तीन वर्ष में यूपी एग्रोटेक को वापस करने थे डेढ़ लाख रुपए

BAREILLY :

अकाउंट में पर्याप्त रकम नहीं होने के बाद भी निवेशक को चेक जारी कर गुमराह करना यूपी एग्रोटेक कामर्शियल इंवेस्टमेंट कंपनी को महंगा साबित हुआ. निवेशक ने चेक बाउंस होने के बाद नकद रकम मांगी तो कंपनी ने नहीं दी. जिस पर निवेशक ने कंज्यूमर फोरम सेकंड में वाद दायर कर दिया. फोरम ने कंपनी के पार्टनर्स को दोषी माना 1 लाख 50 हजार रुपए क्षतिपूर्ति के रूप में वापस करने का आदेश देते हुए 10 हजार रुपए जुर्माना लगा दिया. साथ ही एक माह में रकम वापस नहीं करने पर 7 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है.

तीन वर्ष के लिए किया था निवेश

बहेड़ी के गांव डांडी हमीर दमखोदा निवासी मुकेश कुमार ने दायर वाद में बताया कि उन्होंने यूपी एग्रोटेक कामशिर्यल इंवेस्टमेंट के पार्टनर चन्द्र प्रकाश के कहने पर 1 लाख रुपए तीन वर्ष के लिए टीडीआर के माध्यम से 20 अप्रैल 2015 को जमा किए थे. तय शर्तो के अनुसार कंपनी को 3 वर्ष में डेढ़ लाख रुपए वापस करने थे. तीन वर्ष पूरे होने पर जब मुकेश ने रकम वापस मांगी तो कंपनी की तरफ से उसे डेढ़ लाख रुपए का बरेली ब्रांच एसबीआई का चेक दिया गया. जब मुकेश ने बैंक में 27 अप्रैल 2017 को चेक लगाया तो चेक बाउंस हो गया. जिस पर मुकेश ने रकम नकद मांगी तो उसे रकम वापस नहीं की गई. परेशान होकर मुकेश ने कंज्यूमर फोरम में वाद दायर कर रकम वापस दिलाने की मांग की. जिस पर फोरम के अध्यक्ष ने कंपनी के पार्टनर को तलब किया लेकिन वह हाजिर नहीं हुए. जिस पर कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को एक पक्षीय रुपए से सुनवाई की. जिस पर कोर्ट ने कंपनी को दोषी मानते हुए क्षतिपूर्ति के डेढ़ लाख रुपए मानसिक कष्ट के 5 हजार और वाद व्यय के 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है.