- कहीं प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की मिलीभगत तो नहीं

- आखिर पहले क्यों मिल गई स्कूलों को जांच की सूचना

- शिकायत दर्ज करने पर भी क्यों नही खुली प्रशासन की नींद

MEERUT : न प्रशासन, न जांच अधिकारी और न ही कोई सदस्य, स्कूल के बच्चों की सुनने वाला कोई नहीं था. पब्लिक स्कूलों की जांच में तो स्कूल और प्रशासन की मिलीभगत के बीच आखिरकार पिसे तो बच्चे ही पिसे. शुक्रवार को ऋषभ एकेडमी स्कूल की जांच तो नहीं हुई, लेकिन जांच के नाम पर स्कूल में बखेड़ा जरुर हो गया. यहां तक जहां एक ओर बच्चों ने स्कूल की पोल खोलने की बात कही. वहीं स्कूल बच्चों पर अलग तरह का आरोप मढ़ रहा था. स्कूल और बच्चों के बीच घंटों तक बहस की सूचना देने पर भी मौके पर जांच टीम का एक भी सदस्य नहीं पहुंचा. आखिरकार कहां सो गई थी पब्लिक स्कूलों की जांच टीम, आखिर क्यों नहीं पहुंचे मौके पर अधिकारी.

पहले ही मिल गई सूचना

स्कूल के बच्चों का कहना था स्कूल को पहले ही यह सूचना थी कि स्कूल का निरीक्षण करने टीम आने वाली है. स्कूल के बच्चों ने बताया कि स्कूल ने पहले से ही स्कूल के अग्निशमन यंत्र बदलने के साथ ही स्कूलों में बिकने वाली किताबों को भी छिपा दिया था. जब बच्चों ने इस बात को छिपाने के लिए विरोध किया तो स्कूल ने सीधे सीधे टीसी देने की धमकी देनी शुरू कर दी थी.

तो ऐसे हुआ हंगामा

स्कूल से बाहर निकलते हुए बच्चों ने ऋषभ एकेडमी हाय हाय के नारे लगाने शुरू कर दिए. हंगामा बढ़ते देखकर स्कूल ने पुलिस को बुलवाकर बच्चों को भगाने को कहा. पुलिस ने किसी तरह मामले को थोड़ा शांत किया, लेकिन पुलिस निकलते ही बच्चों ने फिर से हंगामा किया. इस दौरान स्कूल के बच्चों ने जब एसीएम और एडीएम को फोन लगाया तो उनकी किसी ने एक भी न सुनी. यहां तक की बच्चों ने बताया किसी प्रशासनिक अधिकारी ने उन्हें अपनी मनमर्जी से जांच करने की बात भी कही.

आखिर क्यों नहीं पहुंची टीम

स्कूल के बाहर बच्चों का हंगामा होता रहा और जांच टीम किसी अन्य स्कूल में चाय पीती ही रह गई. जबकि स्कूल के बच्चों सहित मीडियाकर्मियों ने भी जांच सदस्यों की टीम को हंगामे की सूचना भी थी, लेकिन सूचना के बावजूद भी टीम ने प्रशासनिक अधिकारी के आर्डर देने की बात कहकर टालमटोल कर दी. इतने हंगामे के बावजूद भी आखिरकार प्रशासनिक अधिकारी कहां थे. आखिर क्यों सोती रह गई जांच टीम. क्या ये प्रशासन और स्कूल की मिलीभगत है या फिर जांच टीम की लापरवाही जो इस तरह की बेफिक्री दिखाई गई.

बच्चों पर ही लगाया आरोप

जहां एक ओर बच्चे स्कूल पर विभिन्न तरह के आरोप लगा रहे थे. वहीं स्कूल की प्रिंसीपल और प्रबंध समिति के अध्यक्ष रंजीत जैन ने इसके पीछे बच्चों को ही दोषी ठहराया. स्कूल का कहना था कि स्कूल में कुछ दिनों से क्क्वीं के चार लड़के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार छेड़छाड़ की घटनाओं को देखते हुए ही स्कूल ने कुछ दिनों पहले लड़कों और लड़कियों का सेक्शन अलग-अलग किया था. जबकि यह लड़के सेक्शन को साथ करने की मांग कर रहे थे. स्कूल द्वारा इस बात को न मानने पर ही इस तरह से माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है. प्रिंसीपल रीता सिरोही ने बताया कि स्कूल में बड़ी क्लास के लड़के-लड़कियों के साथ बैठने की जिद कर रहे हैं. जबकि बिगड़ते माहौल को सुधारने के लिए ही स्कूल ने सेक्शन अलग किया था. प्रबंध समिति अध्यक्ष रंजीत जैन का कहना है कि स्कूल में बच्चों की इस तरह की मनमानी बिल्कुल भी नहीं चलेगी. स्कूल ने बच्चों को टीसी काटने के लिए नहीं कहा था. हां इतना जरूर है कि बच्चों को डांटा गया है.

बयान देने से लगता है डर

स्कूल के बच्चों का कहना था कि हमें स्कूल की ड्रेस में बयान देते हुए भी डर लगता है. कहीं ऐसा न हो कि सर हमें पहचान लें और स्कूल से निकाल दें या फिर पुलिस के पास दे दें. क्योंकि स्कूल ने हमें साफ कहा है कि अगर आप स्कूल की कमियों को किसी के सामने बताएंगे तो स्कूल से निकालने के बाद पुलिस तक भी बात जाएगी. स्कूल के बच्चों ने बताया कि इसी बात को लेकर सभी बच्चे भड़क गए थे और स्कूल ने पीछे के गेट से चलता कर दिया. जैसे ही स्कूल के बाहर आए तो बच्चों ने हंगामा शुरू कर दिया था. बच्चों का तो ये भी कहना था कि स्कूल में जबरदस्ती एक ही शॉप से ड्रेस और जूते खरीदने पर जोर डाला जाता है.

स्कूल में कुछ स्टूडेंट्स माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं. कुछ दिनों से लड़के व लड़कियों का सेक्शन अलग करने से यह स्टूडेंट्स ऐसा कर रहे हैं.

- रंजीत जैन, अध्यक्ष प्रबंध समिति

लगातार स्कूल का माहौल बिगड़ते देखकर ही स्कूल में ग‌र्ल्स और ब्वॉय का सेक्शन अलग किया गया था. इसी वजह से कुछ स्टूडेंट्स माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं.

- रीता सिरोही, प्रिंसीपल स्कूल