- तेजाबी हमलों पर शासन अलर्ट, पांच मई को जारी किया नया शासनादेश

- सरकारी अस्पतालों को मिलेंगे प्लास्टिक सर्जन, नई बर्न यूनिट भी बनेंगी

- लैबों, शिक्षण संस्थानों एवं अनुसंधान केन्द्रों में उपलब्ध एसिड की जांच करेगा प्रशासन

Meerut : तेजाब के हमले की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए प्रशासन कई स्तरों पर एहतियात बरतेगा. सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब न सिर्फ एसिड के स्टाफ पर निगरानी रखी जाएगी, बल्कि आसपास के प्रमुख स्वास्थ्य केन्द्रों में बर्न यूनिट भी अनिवार्य होगी. महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा ने पांच मई को शासनादेश जारी कर इस आशय से सभी सीएमओ एवं सीएमएस को अवगत करा दिया है. स्वास्थ्य केन्द्रों को प्लास्टिक सर्जरी की सुपरस्पेशलिटी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी.

यहां तो सुलग रही बर्न यूनिट की किस्मत

पीएल शर्मा जिला अस्पताल में तीन वर्ष पहले बर्न यूनिट का निर्माण शुरू हुआ. बनने के बाद एक वर्ष तक बिल्डिंग निरुद्देश्य खड़ी रही. शासन के निर्देश के बाद बर्न यूनिट में सर्जिकल वार्ड शुरू कर दिया गया, और बर्न यूनिट की धारणा पिछड़ने लगी. शासन को कई बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद बर्न यूनिट के लिए प्लास्टिक सर्जन, नर्सिग स्टाफ एवं बैरियर नर्सिग क्यूबिल ग्लास नहीं लगाया गया. जली हुई बॉडी को ढंकने के लिए प्लास्टिक शील्ड अब तक नहीं मंगाई जा सकी. तेजाब के हमले के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट की रुलिंग एवं शासनादेश को देखते हुए सीएमएस डा. रामेन्द्र सिंह ने बर्न यूनिट के लिए संसाधन जुटाने को लेकर शासन को एक बार रिमाइंडर भेजा है. सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भी बर्न यूनिट के लिए भी प्रस्ताव मांगा गया है.

एसिड अटैक के घायलों का फ्री इलाज

एसिड हमले की बढ़ती घटनाओं का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ख्ख् अप्रैल को निर्णय दिया है कि घायलों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी. इसमें चूक होने पर सीएमओ एवं सीएमएस जिम्मेदार होंगे. इलाज की सुविधाओं को अपग्रेड करने के लिए सभी बर्न यूनिटों को हाइटेक किया जाएगा.

लैबों पर भी होगा नियंत्रण

एसिड का प्रयोग करने वाले अनुसंधान केन्द्रों, लैबों, प्रयोगशालाओं एवं सार्वजनिक उपक्रमों को हर माह स्टाक के उपलब्धता की रिपोर्ट देनी होगी. इसकी जांच उप जिला मजिस्ट्रेट करेंगे. अगर किसी स्थान पर तेजाब का प्रयोग अनिवार्य हुआ तो प्रयोग करने वाले संस्थान को जिम्मेदारी निभानी होगी.

'पीएल शर्मा अस्पताल में बर्न यूनिट बनी तो है किंतु प्लास्टिक सर्जन समेत अन्य सुविधाएं न होने पर उद्देश्य पूरा नहीं हुआ. शासन को फिर से प्रस्ताव भेजा जाएगा.'

- डॉ. रामेन्द्र सिंह, सीएमएस, पीएल शर्मा जिला अस्पताल

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आई नेक्स्ट ने चलाई थी मुहिम

गौरतलब है कि दिसंबर के आखिरी सप्ताह में आई नेक्स्ट ने स्टॉप एडिस अटैक को लेकर मुहिम चलाई थी. जिसके अंतर्गत सिटी को एसिड फ्री करने का मुद्दा उठाया गया था. जिसमें काफी हद तक आई नेक्स्ट ने सफलता भी पाई थी. ऐसे में शासन का कदम काफी काबिलेतारीफ है.