-एनआईए के निर्देश पर असोम पुलिस ने किया दोस्त को अरेस्ट

-पूछताछ के लिये असोम पुलिस की टीम राजधानी पहुंची

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रुष्टयहृह्रङ्ख : कानपुर से गुरुवार को दबोचा गया हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकी कमरुज्जमा उर्फ डा. हुरैरा उर्फ कमरुद्दीन अपने दोस्त के सिम कार्ड से करतूतों को अंजाम दे रहा था. एनआईए के निर्देश पर असोम में मौजूद आतंकी के दोस्त को अरेस्ट कर लिया गया है. वहीं, आतंकी से पूछताछ के लिये एक महिला डिप्टी एसपी के नेतृत्व में असोम पुलिस की टीम राजधानी पहुंच गई है. यह टीम शनिवार को आतंकी से पूछताछ करेगी.

दोस्त के अकाउंट से मंगाए रुपये

एटीएस ने शुक्रवार को आतंकी कमरुज्जमा को सात दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की है, जिसमें पता चला है कि उसे अपने दोस्त के अकाउंट के जरिये 30 हजार रुपये मिले थे. यह रकम कहां से और किसने जमा की, इसका पता लगाया जा रहा है. इसी के साथ उसके सिम की पड़ताल में पता चला कि वह सिम असोम निवासी शाहनवाज के नाम पर दर्ज है. पूछताछ में आतंकी कमरुज्जमा ने बताया कि शाहनवाज उसका करीबी दोस्त है और उसके संग कश्मीर में भी रहा है.इस जानकारी के आधार पर एनआईए के निर्देश पर असोम पुलिस ने उसे आतंकी के गांव से ही उसे अरेस्ट किया है. अब सुरक्षा एजेंसियां शाहनवाज से पता करने की कोशिश कर रही है कि हिजबुल के नेटवर्क में उसकी कितनी भागीदारी है.

हर रोज मोबाइल कर देता था फॉर्मेट

आतंकी कमरुज्जमा के मोबाइल की छानबीन में सामने आया है कि वह ब्लैकबेरी मैसेंजर सर्विस के जरिये अपने आकाओं से चैटिंग करता था. उसके मोबाइल से दो पिन कोड भी मिले हैं. अब तक की छानबीन में सामने आया है कि कमरुज्जमा को कंप्यूटर व इलेक्टानिक गैजेट के प्रयोग की भी अच्छी ट्रेनिंग दी गई थी. कमरुज्जमा हर रोज अपने मोबाइल फोन को फार्मेट कर देता था. ताकि उसके पकड़े जाने पर पुलिस अथवा जांच एजेंसी को मोबाइल फोन से कोई सुराग न मिल सके. चालाकी के चलते ही उसने केवल दो नंबर ही मोबाइल में फीड कर रखे थे. उल्लेखनीय है कि अप्रैल में एके-47 के साथ कमरुज्जमा की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से एनआईए व एटीएस उसकी तलाश में लगी थी. एटीएस ने गुरुवार को कानपुर पुलिस की मदद से कमरुज्जमा को दबोच लिया था.

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शर्ट की जेब में मोबाइल रखकर बनाया था वीडियो

कमरुज्जमा ने कानपुर के चकेरी क्षेत्र स्थित सिद्धि विनायक मंदिर के कई चक्कर लगाये थे. उसने शर्ट की जेब में मोबाइल फोन रखकर वहां की वीडियो क्लिप बनाई थी. मंदिर के भीतर के दृश्यों के अलावा उसने बाहर के रास्तों को भी वीडियो में कैद किया था. एटीएस अधिकारियों को यही आशंका है कि इसी मंदिर में गणेश उत्सव के दौरान बड़ी घटना की साजिश रची जा रही थी.