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. मकान में आग सांसद के दामाद के दोस्त ने ही लगाई थी. लोगों की मानें तो रुपये उधार नहीं देने पर वर्षो पुरानी दोस्ती टूट गई. दुश्मनी भी इस कदर हुई कि दोस्त ने दोस्त को परिवार समेत जिंदा जलाने का प्रयास किया. रात में आग लगाने के बाद सुबह तमाशा देखने पहुंचे आरोपी को पुलिस ने मौके से दबोच लिया.

सीसीटीवी में हुआ था कैद
पड़ोस में लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी घटना कैद हो गई. पड़ोसी और परिवार के लोगों ने आरोपी युवक की पहचान की. उसका नाम संजय शर्मा उर्फ कालू बताया गया है. रात 1:35 बजे वह फुटेज में आता हुआ दिखाई दिया. लोगों ने बताया कि उसके पास एक कैन था. सम्भवत: उसमें पेट्रोल रहा होगा. उसने पहले मेनगेट के ऊपर से अंदर जाकर पेट्रोल डाला. फिर आग लगा कर तुरंत भाग गया.

लोगों ने पहचान लिया
गुरुवार सुबह साढ़े दस बजे भीड़ मौके पर जुटी हुई थी. पुलिस भी सादा कपड़ों में वहां घूम रही थी. उसी दौरान संजय वहां पर मुआयना करने आ गया. वह मकान के सामने खड़ा होकर उसे निहार रहा था. पुलिस की कार्रवाई पर नजर रख रहा था. उसी दौरान लोगों ने उसे पहचान लिया और पुलिस को सूचना कर दी. पुलिस ने उसे मौके से पकड़ कर थाने पहुंचा दिया.

दोस्त ही बन गया दुश्मन
लोगों ने बताया कि संजय और कमल के बीच करीब 14 साल पुरानी दोस्ती थी. संजय एटीएम मैकेनिक है, लेकिन हाल-फिलहाल कुछ नहीं कर रहा है. कुछ साल पहले उसने कमल से रुपये लिए थे, जो किस्तों में चुकाए. अब वह फिर से रुपये मांग रहा था. पांच दिन पहले दोनों में इस बात को लेकर विवाद भी हुआ था. वह कमल के घर पर आता-जाता रहता था. आसपास के लोग भी उसे इसी लिए जानते थे.

बेटे से मांग रहा था चौथ
सांसद के दामाद कमल ने मामले में नामजद मुकदमा दर्ज कराया है. मुकदमें के मुताबिक पत्‍‌नी जागी तो कांच टूटने की आवाज आई. इसके बाद आग की जानकारी हुई. परिवार किसी तरह बचा. पड़ोसी के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी तो संजय शर्मा उर्फ कालू निवासी सेक्टर-6 दिखाई दिया. काफी दिनों से संजय तीन लाख की चौथ मांग रहा था. न देने पर बच्चे को उठाने की धमकी दी थी. फिर भी उसे रुपये नहीं दिए. इसी बात से तैश में आकर उसने घर में आग लगा दी.

चौकी इंचार्ज ने बचाया धमाका
जिस दौरान घर में आग लगी थी और दमकल आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही थी. उस दौरान डिवीजन चौकी इंचार्ज अनुज कुमार भी वहां थे. किचिन में आग के बीच घरेलू सिलेंडर रखा हुआ था. आग कभी भी सिलेंडर में लग सकती थी. चौकी इंचार्ज ने साहस का परिचय देते हुए आग की लपटों के बीच से सिलेंडर उठा लिया. दौड़ कर उसे पार्क में लाकर रखा. लोगों का कहना था कि अगर सिलेंडर आग पकड़ता तो बड़ा हादसा हो सकता था.