छ्वन्रूस्॥श्वष्ठक्कक्त्र: जुगसलाई के चौक बाजार निवासी बजरंग लाल भरतिया का शव शनिवार की शाम करीब चार बजे उनके आवास पर पहुंचा. शव के पहुंचते ही बेटी, बहू व पोती दहाड़े मार-मारकर रोने लगी. उनकी इस दशा को देखकर आस-पड़ोस की महिलाएं भी अपने आंसू रोक नहीं सकीं. वे भी फूट-फूटकर रोने लगीं. पूरे क्षेत्र का माहौल गमगीन हो गया था. सबकी जुबान पर एक ही बात थी, बजरंग लाल भरतिया जैसे अच्छे इंसान को भगवान जल्दी क्यों बुला लेते हैं.

शव को दिया कांधा

बजरंग लाल भरतिया के निवास के समीप सुबह से ही उनके रिश्तेदार व समाज के लोगों की भीड़ लगी हुई थी. भरतिया के अंतिम दर्शन करने के लिए बारीडीह, साकची, भालूबासा, जुगसलाई टेल्को, सोनारी व कदमा के मारवाड़ी समाज के लोग ज्यादा पहुंचे थे. उनकी अर्थी को कांधा सीजीपीसी के चेयरमैन शैलेंद्र सिंह ने भी दिया.

20 मिनट तक चला रश्म

बजरंग लाल भरतिया के शव शनिवार की शाम करीब चार बजे निवास स्थान पहुंच गया था. निवास के बाहर ही शव को रखकर सारी रश्में अदा की गईं. वहीं दो मंजिला मकान के खिड़की से उनकी बेटी, बहू, पोती व अन्य रिश्तेदार भरतिया के शव को निहार रहे थे. उनके रोने की आवाज सुनकर सबकी निगाह खिड़की की ओर जा टिकीं. बाद में परिवार की महिलाएं घर से बाहर आई और भरतिया के शव को इर्द गिर्द चक्कर लगाकर रस्म अदा की. करीब 20 मिनट में ही सारी रस्में अदा कर शव को करीब 4.20 बजे शिव घाट की ओर अंतिम यात्रा शुरू कर दी गई.

घर के समीप ही दी गई श्रद्धांजलि

भरतिया के निवास के समीप ही उनका शव जमीन पर रखा हुआ था. उनके शव के पास विभिन्न समुदाय व गणमान्य लोगों ने उनके ऊपर फूल माला चढ़ाकर उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की. श्रद्धांजलि देने के बाद अर्थी को लेकर पैदल ही कुछ दूर तक समाज के लोग व रिश्तेदार गए. इसके बाद वाहन में शव को रखकर जुगसलाई स्थित शिव घाट तक ले गए जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ.

जुगसलाई की दुकानें रही बंद

भरतिया के निवास के आस पास जितनी भी दुकानें हैं, शव आते ही दुकानदारों ने उसे बंद कर दिया. दुकानदार उनकी अंतिम यात्री में शामिल हो गए. कुछ दुकानदारों ने तो सुबह से ही अपनी दुकानें बंद रखी थी.

प्रतिदिन जाकर बैठते थे शिव घाट में

भरतिया जुगसलाई शिव घाट के संरक्षक थे. उनके प्रयास से ही शिव घाट का निर्माण हुआ था. वे प्रतिदिन शिव घाट में जाकर एकांत में बैठते थे. वहां पर उनका चिंतन-मनन चलता रहता था. उसी शिव घाट में बजरंग लाल भरतिया हमेशा-मेशा के लिए खो गए.

शव यात्रा में हुए शामिल

मारवाड़ी युवा मंच, महाकलेश्वर छठ घाट समिति, मारवाड़ी महिला मंच, अग्रवाल समाज, बाल भारती स्कूल, राजस्थान शिव मंदिर कमेटी, माहेश्वरी मंडल कमेटी, राजस्थान सेवा सदन अस्पताल, बाल गुणगान मंडल, ब्रह्मकुमारी, खुदरा वस्त्र विक्रेता संघ, चेंबर ऑफ कॉमर्स, अग्रवाल सम्मेलन, पूर्वी जिला मारवाड़ी सम्मेलन, जिला सम्मेलन झारखंड के पदाधिकारी शामिल थे. इसके अलावा मुरारी लाल गोयल, पवन अग्रवाल, राजकिशोर मोदी, मुरलीधर केडिया, सुरेश सोंथालिया, अशोक भालोटिया, कैलाश सराईवाला, अशोक गोयल, राजेश मेंगोटिया, बालमुकुन्द गोयल, सरदार शैलेन्द्र सिंह, लिप्पु शर्मा, उमेश साह आदि शामिल हुए.

एनडीआरएफ की टीम सम्मानित

भरतिया के शव खोजने में लगी एनडीआरएफ की टीम व सिटी एसपी, पुलिस उपाधीक्षक लॉ न आर्डर को शॉल व बुके देकर मारवाड़ी युवा मंच की ओर से महाकलेश्वर छठ घाट द्वारा सम्मानित किया गया.