- 1929 में महात्मा गांधी दो हफ्ते रुके थे कौसानी में

- अनासक्ति योग पर लिखी थी टीका

देहरादून, कुमाऊं के कौसानी में स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अनासक्ति आश्रम का अब कायाकल्प होने जा रहा है. ब्रिडकुल द्वारा आश्रम का जीर्णोद्धार किया जाएगा. वर्ष 1929 में महात्मा गांधी कौसानी में दो हफ्ते रुके थे. अपनी साहित्य में गांधी ने इसका वर्णन भी किया है. दो सप्ताह तक रुके थे, इस स्थान का वर्णन खुद गांधी ने किया है.

सीएम ने देखी बदहाली तो बनी योजना

कुछ दिनों पहले चीफ सेक्रेटरी उत्पल कुमार सिंह कुमाऊं दौरे पर थे. इसी दौरान उनकी नजर इस ऐतिहासिक स्थान पर पड़ी. इसके लिए खुद चीफ सेक्रेटरी ने मौके का मुआयना किया. उसी वक्त अधिकारियों को एस्टीमेट बनाने के निर्देश दिए और उसके बेहतर रख-रखाव के लिए केंद्र सरकार से बजट की डिमांड की.

2.5 करोड़ की पहली किश्त अवमुक्त

आश्रम के जीर्णोद्धार के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है. डीपीआर के तहत फ‌र्स्ट फेज के कार्यो के लिए ढाई करोड़ रुपए की धनराशि भी अवमुक्त की जा चुकी है. ब्रिडकुल द्वारा जल्द ही योजना पर काम शुरू किया जाएगा.

फेमस टूरिस्ट प्लेस है आश्रम

गांधी आश्रम का दीदार करने हर वर्ष हजारों की संख्या में देश-विदेश के टूरिस्ट्स पहुंचते हैं. आश्रम का ऐतिहासिक महत्व तो है ही, टूरिज्म के लिहाज से भी यह जगह दर्शनीय है. लेकिन, आश्रम की स्थिति जीर्ण-शीर्ण हो गई थी. इसी को देखते हुए अब आश्रम का कायाकल्प करने की तैयारी है. आश्रम के कार्मिकों ने आश्रम में ही अपना निवास स्थान बना लिया था, अब उनके लिए भी अलग से आवास बनेंगे.

इतिहास पर एक नजर

कौसानी कुदरती सुंदरता के लिए फेमस है. आस-पास चाय के बागान हैं, जिससे इस स्थान की खूबसूरती और बढ़ जाती है. यहीं स्थित है महात्मा गांधी का अनाशक्ति आश्रम. 1929 में जब गांधी भारत का दौरा कर रहे थे, तब वे कौसानी में रुके. वे यहां सिर्फ दो दिन रुकना चाहते थे, लेकिन यहां की सुंदरता के वे कायल हो गए और दो हफ्ते यहां रुके. यहां रुककर उन्होंने गीता पर आधारित अनासक्ति योग पर टीका लिखी. तभी से जहां वे रुके उस जगह को अनासक्ति आश्रम कहा जाने लगा. आश्रम के अंदर स्मृति के रूप में गांधी के संबंधित कुछ वस्तुएं भी संरक्षित की गई हैं. विजिटर्स के लिए यहां लाइब्रेरी की फैसिलिटी भी है. अप्रैल से जून तक और सितंबर से अक्टूबर तक यहां पर ज्यादा संख्या में विजिटर्स पहुंचते हैं.