JAMSHEDPUR: गैंगस्टर अखिलेश सिंह ने फ्0 नवंबर ख्0क्म् को दिन-दहाड़े जमशेदपुर सिविल कोर्ट के बार एसोसिएशन कैंपस में बागबेड़ा कॉलोनी के रहनेवाले ट्रांसपोर्टर उपेंद्र सिंह की हत्या करवा दी थी. इतना ही नहीं अखिलेश अपने विरोधी अमित राय का मर्डर छह दिसंबर ख्0क्म् करवा दिया था. इन मर्डर के बाद जमशेदपुर पुलिस सिदगोड़ा ख्8 नंबर रोड निवासी अखिलेश सिंह की तलाश जमशेदपुर पुलिस की टीम बनारस, गाजियाबाद, नोएडा, गुडगांव, राजस्थान, जबलपुर, छत्तीसगढ़, बंगाल, बिहार के बक्सर, डुमराव, भोजपुर, पटना, उत्तर प्रदेश और नेपाल में पिछले एक साल से कर रही थी. एसएसपी अनूप टी मैथ्यू दूसरे राज्यों की पुलिस से लगातार संपर्क में थे. अखिलेश सिंह के खिलाफ अब तक भ्फ् मामले दर्ज हैं. एसएसपी ने बताया कि मामले अधिक भी हो सकते हैं.

तीसरी बार पकड़ में आया

अखिलेश सिंह मूल रूप से बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव सिमरी नगवा धनंजयपुर का रहने वाला है. पहली बार पुलिस ने उसे पैतृक आवास से गिरफ्तार किया था. दूसरी बार नोएडा से दबोचा गया. तीसरी बार गुरुग्राम से पकड़ा गया.

पुलिस ने की थी कुर्की

ट्रांसपोर्टर उपेंद्र सिंह और अमित राय हत्याकांड में पुलिस ने उसके सिदगोड़ा और बिरसानगर स्थित सृष्टि गार्डेन के फ्लैट की कुर्की की थी. इसके बावजूद वह कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ. इसके बाद जमशेदपुर पुलिस उसकी जमानत रद कराने को झारखंड हाई कोर्ट गई. आवेदन दाखिल कर बताया गया कि उसने जमानत की शर्ते तोड़ी है एवं जेल से बाहर रहते हुए गंभीर अपराध कर रहा है. इसके बाद हाई कोर्ट ने जिला व्यवहार एवं सत्र न्यायालय को पत्र लिखकर यह जानना चाहा कि अखिलेश सिंह ने निचली अदालत में हाजिर होने की शर्त को तोड़ा है अथवा नहीं. जिला न्यायालय से पूरी रिपोर्ट को भेजी गई है. इसके बाद हाई कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी.

ए कंपनी के नाम से लेता था रंगदारी

अखिलेश ने गैंग बनाकर लौहनगरी की स्टील कंपनियों से स्क्रैप कारोबारियों से गुंडा टैक्स वसूलना शुरू किया था. पुलिस के मुताबिक पांच साल से उसका प्रभुत्व हो चुका था. स्क्रैप खरीदने के बाद 'ए कंपनी' के नाम एक पर्ची कटती थी. दो सौ रुपए टन के हिसाब से खरीदार को गैंग को रंगदारी देनी पड़ती थी. स्क्रैप की नीलामी में गैंगस्टर का दखल था. कंपनियों से उसी को ठेका मिलता था जो 'ए कंपनी' के बनाए कथित नियमों को मान लेता था.

हैं तीन दर्जन लग्जरी गाडि़यां

कुख्यात बदमाश लोगों को प्रताडि़त कर जुटाई गई रकम से प्रापर्टी खरीदने के साथ-साथ लग्जरी कार का शौक भी पूरा करता था. उसके पास से फ्भ् वाहनों की चाबी पाई गई. हालांकि रेस्ट हाउस के पास से एंडेवर (एसयूवी) बरामद हुई है. इसे दिल्ली निवासी संजय अग्रवाल के नाम से दिल्ली से खरीदा गया है. अभी उसकी आरसी नहीं जारी हुई है. पूछताछ में अखिलेश की पत्नी गरिमा ने फ्ब् अन्य कारें होने की बात बताई हैं. इनमें मर्सडीज से लेकर ऑडी कार भी शामिल हैं. वाहन दिल्ली व अन्य शहरों में रहने वाले गैंग के गुर्गो के यहां हैं. अखिलेश पुलिस से बचने के लिए बदल-बदल कर इन कारों का इस्तेमाल करता था. कहीं जाने के लिए एक कार और लौटने के लिए दूसरी कार का यूज करता था. पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक वह अपने फ्लैटों में नहीं रहता था. फ्लैटों को उसने किराए पर लगा दिया है. वह पत्नी के साथ होटल या रेस्ट हाउस में रुकता था. दो माह पहले वह गुरुग्राम में क्0 दिन रुककर गया था.

अखिलेश के पिता पर हुई थी गोलीबारी

अपराधी अखिलेश सिंह के पिता चंद्रगुप्त सिंह पर सिदगोड़ा ख्8 नंबर आवास के सामने क्ख् सितंबर ख्0क्7 को अपराधियों ने पांच राउंड फाय¨रग की थी. पुलिस ने मामले में बाबू सिंह, टिंकू गोस्वामी, दीपक मिश्रा और संजय सोना को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. चंद्रगुप्त सिंह पर फाय¨रग के लिए बिहार से दो शूटरों को हरपाल सिंह हीरे ने शहर बुलाया था.

देहरादून से दबोचा गया था विक्रम शर्मा को

भ्0 हजार का इनामी अखिलेश का आपराधिक गुरु अपराधी विक्रम शर्मा को उत्तराखंड के देहरादून से क्भ् अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था. वह पिछले नौ वर्षो से विक्रम फरार था. उसकी पहचान गैंगस्टर अखिलेश सिंह और गिरोह का मास्टर माइंड के रूप में है. विक्रम व अखिलेश सिंह बिजनेस पार्टनर भी हैं. दोनों ने अपराध की दुनिया में एक साथ ही कदम रखा था.

भुवनेश्वर से पकड़ाया था बड़ा भाई

अखिलेश सिंह का बड़ा भाई और श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे हत्याकांड में सजायफ्ता अमलेश सिंह को पुलिस ने ओडि़शा के भुवनेश्वर एयरपोर्ट से सात सितंबर ख्0क्7 को जमशेदपुर पुलिस की सूचना पर पकड़ा गया था. उसे ओडि़शा पुलिस ने गिरफ्तार किया था.