-16 साल की उम्र में पहली बार झूठ बोलकर किया था रक्तदान

क्कन्ञ्जहृन्: 16 साल की उम्र में गौरव ने एक इंसान की जान बचाने के लिए झूठ बोला. उस झूठ ने पूरा जीवन बदल दिया. 16 साल की उम्र में गौरव ने जो सिलसिला शुरू किया आज वह इतिहास बन गया है. पटना का मान बढ़ाने वाले गौरव ने 47 साल की उम्र में 78 बार रक्तदान किया है और 65 साल की उम्र तक रिकार्ड बनाना चाहते हैं. मजे की बात तो यह है कि अब तक उन्होंने जितना भी ब्लड डोनेशन किया है उसमें 90 प्रतिशत लोग अनजान थे जिनसे आज खून का रिश्ता बन चुका है.

झूठ बोलने के बाद बना लक्ष्य

मूल रूप से सिवान के निवासी और मौजूदा समय में पटना के कृष्णानगर में रह रहे 47 वर्षीय गौरव का कहना है कि 16 साल की उम्र में इंजेक्शन से काफी डरते थे. ब्लड डोनेशन तो दूर इस नाम से कांप जाते थे. लेकिन ऐसा दिन आया जो लाइफ ही बदल दिया. गौरव बताते हैं कि एक दोस्त के भाई का एक्सीडेंट हुआ था. परिवार वालों को पटना पहुंचने में देरी हो रही थी. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे और घायल अवस्था में दोस्त के भाई को लेकर कुर्जी हॉस्पिटल पहुंच गए. डॉक्टरों ने तत्काल खून की मांग की. आसपास कोई था नहीं इसलिए खुद काउंटर पर खून देने चले गए. सही उम्र बताया तो ब्लड लेने से मना कर दिया गया. फिर दूसरे काउंटर पर गए और दोस्त के भाई की जान बचाने के लिए झूठ बोला और अपनी उम्र 18 साल बताकर रक्तदान किया. जिंदगी की जंग लड़ रहे इंसान की जान बचाकर बहुत खुशी हुई और इस क्षेत्र में आगे बढ़ते चले गए.

ऐसे बन रहा है खून का रिश्ता

गौरव फिलहाल हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनाने वाले उत्सव सेफ्टी के बिहार इंचार्ज हैं. वह बताते हैं कि एक बार पटना मेडिकल कॉलेज गए और वहां एक छोटा सा स्टीकर देखा जिसपर लिखा था रक्तदान महादान, यह देख रक्तदान का महत्व समझ में आया और इसके बाद नहीं रुके. आज तक लगातार ब्लड डोनेट कर रहे हैं. गौरव बताते हैं कि किसी की जान बचाकर कितनी खुशी होती है यह बता नहीं सकते. 16 साल की उम्र में शुरू हुई रक्तदान की कहानी से अब तक सैकड़ों परिवार से खून का रिश्ता बना चुके हैं. जिसे भी खून दिया वह परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं. 78 बार खून देकर 47साल की उमर में बहुत रिश्ता बना चुके हैं. आज हदय की बीमारी, चीनी की बीमारी या अन्य किसी बीमारी से ग्रसित नहीं हैं. 129 ऐसे लोगो से रक्तदान करवाया जो कभी खून दिए ही नहीं थे.