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RANCHI : खुशबू की आंखें जो न पढ़ पाई, अब उन्हीं आंखों से कोई और पढ़ेगा। खुशबू के पिता दामोदर साहू ने अपनी बेटी की आंखें दान कर दी हैं। बेटी तो चली गई पर पिता की इच्छा है कि उसकी आंखें इस दुनिया में रौशन रहें। 15 मई की सुबह खुशबू ने केतारी बगान रेलवे फाटक के नजदीक ट्रेन के सामने कूदकर सुसाइड कर लिया था। इससे एक दिन पहले ही बारहवीं का रिजल्ट आया था, जिसमें खुशबू को एकाउंट्स में कम मा‌र्क्स आए थे। डिप्रेशन में उसने यह कदम उठा लिया। जिसके बाद खुशबू के परिवार ने फैसला किया कि नेत्रदान के जरिए वे किसी और की जिंदगी रौशन करेंगे।

तीन दिन में तीन का हुआ दान

राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस रिम्स में तीन दिन में ही किसी कारण वश मृत्यु पाये तीन लोगों का आई डोनेट कराया गया। जो लोग इस दुनिया में नहीं हैं उनके सपने को दूसरे की आंखों से देखने के लिए यह नेत्र दान कराया गया। हाल के दिनों में रिम्स में नेत्रदान करने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है।

इनका हुआ नेत्रदान

-खुशबू कुमारी के पिता ने अपने 17 साल बेटी का नेत्रदान किया। जिसकी मृत्यु ट्रेन के सामने कूदने से हुई। खुशबू नया टोली सामलौंग नामकुम की रहने वाली थी।

-बगही टोला बांकी पुर परैया गया के रहने वाले देवराज प्रजापति ने अपने 28 वर्षीय भाई का आई डोनेट कराया। दुर्घटना में घायल होने के बाद इनकी रिम्स में इलाज को दौरान मौत हुई थी।

- शिवाडीह बड़कागांव हजारीबाग के रहने वाले राजेश सोनी ने अपने भाई मुन्नू सोनी का नेत्रदान कराया, इनकी मृत्यु करंट लगने से हो गई थी।

- पटेल नगर भुरकुंडा रामगढ़ निवासी जलेश्वर सिंह का नेत्र प्रत्यारोपण किया गया। एसटीओ सुनील कुमार ने यह प्रत्यारोपण किया। इनकी आंख में रोशनी मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद चली गई थी। नेत्रदान प्रक्रिया में अभिमन्यु कुमार, असलम परवेज और आई बैंक की पूरी टीम ने सहयोग किया।