क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: एक ट्रैफिकिंग विक्टिम नाबालिग के मां-बाप चाईबासा में मिल गए थे. लेकिन, घर पहुंचाने के बजाय रांची सीडब्ल्यूसी ने उसे चाईबासा सीडब्ल्यूसी रेफर कर दिया था. इसके बाद एक बाल अधिकार कार्यकर्ता जबरन उसे रांची ले आया और दिखावे के लिए एक निजी स्कूल में दाखिला करवा दिया और बच्चों को खेलाने का काम करवाने लगा.

सीडब्ल्यूसी के विरोध पर दिखाया पावर

बच्ची को जब लाने का विरोध चाईबासा सीडब्लूसी की मेंबर ने किया तो बाल अधिकार कार्यकर्ता ने अपने पावर का इस्तेमाल कर उसे चुप करा दिया. वह महिला मेंबर चुप हो गई, लेकिन वह आज भी इस बात को नही भूली है.

पढ़ाने के बहाने कराता है अन्य काम

उक्त बाल अधिकार कार्यकर्ता नाबालिग और कम उम्र के बच्चों का लीगल गार्जियन बन जाता है. जब कभी उसे पता चलता है कि कहीं से नाबालिग की ट्रैफिकिंग की गई है तो वह उसे पढ़ाने और संरक्षण देने की आड़ में ले लेता है और उसे अन्य कामो में लगाया जाता है.

पालो टूटी के पिता पहुंचे हाईकोर्ट

इधर, सहयोग विलेज में पालो टूटी की मौत मामले में उसके पिता प्यारन टूटी हाईकोर्ट पहुंच गए हैं. उनका कहना है कि उनकी बेटी को जान बूझकर सीडब्ल्यूसी और खूंटी सहयोग विलेज ने मार डाला है. ऐसे में वे हाईकोर्ट से उन लोगों के खिलाफ याचिका दर्ज करने पहुंचे थे. संभवत: सोमवार को इस संबंध में रांची सीडब्ल्यूसी, खूंटी सीडब्ल्यूसी और सहयोग विलेज पर मुकदमा दर्ज होगा.

इधर, दोबारा अस्पताल पहुंचा मंगरा मुंडा

सागर कांडिर जिस मंगरा मुंडा को घर ले आया था. उसे पुन: अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उसकी तबीयत बहुत खराब है. गौरतलब हो कि दो दिन पूर्व ही उसे रानी चिल्ड्रन अस्पताल से ले जाया गया था. फिर उसे वहां पर एडमिट किया गया है.