aditya.jha@inext.co.in

PATNA : अगर आपसे ये कहें की एशिया की सबसे बड़ी कॉलोनी में संचालित सरकारी विद्यालय जहां छात्राएं एक किमी दूर से पीने के लिए पानी भर के लाती है। शौचालय के लिए उन्हें क्लास छोड़कर घर जाना पड़ता है तो सुनकर आश्चर्य होगा। मगर ये हकीकत है। हम बात कर रहे हैं वीर चंद पटेल कन्या मध्य विद्यालय की। जहां सात माह से छात्राओं को पीने के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते छात्राओं को चपरासी का कार्य करना पड़ रहा है।

7 माह से खराब है नल

सीएम नीतीश कुमार भले कन्या शिक्षा को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के योजनाएं संचालित कर रहें हो। मगर जमीनी हकीकत कुछ और है। स्थिति यह है कि सरकारी स्कूलों में छात्राएं मूल भूत सुविधाएं से ही वंचित है। नाम न छापने के शर्त पर वीर चंद पटेल कन्या मध्य विद्यालय की एक छात्रा ने बताया कि स्कूल में पिछले 7 माह से पानी वाले पानी का नल खराब है। पानी पीने के लिए स्कूल के बाहर से पानी भर के लाना पड़ता है। इतना ही नहीं पटना शहर के इस स्कूल में शौचालय तक की व्यवस्था तक नहीं है। अब आप खुद देखिए जब राजधानी का यह हाल है तो बाकी जिलों की क्या स्थिति होगी।

चपरासी का काम करती छात्रा

रघुनाथ प्रसाद स्कूल परिसर में संचालित वीर चंद पटेल कन्या मध्य विद्यालय में कर्मचारियों की कमी के कारण छात्राओं को चपरासी का काम भी करना पड़ता है। स्कूल की शिक्षिका ने बताया कि यहां घंटी बजाने के लिए भी कर्मचारी नहीं है ऐसे में बच्चे खुद घंटी बजाते हैं। 250 स्टूडेंट्स के इस स्कूल में 11 शिक्षक हैं मगर एक भी कर्मचारी नहीं है।

वीर चंद पटेल कन्या मध्य विद्यालय की प्रिसिंपल कौशल्या कुमारी और दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के रिपोर्टर के बीच हुई बातचीत के अंश।

रिपोर्टर - स्कूल में पानी पीने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है क्या?

प्रिंसिपल - अभी नहीं है।

रिपोर्टर - कब से नहीं है ?

प्रिंसिपल - लगभग 7 माह से।

रिपोर्टर - बच्चे एक किमी दूर से पानी भर के लाते हैं?

पि्रंसिपल - हां, स्कूल के बाहर से लाते है।

रिपोर्टर - शौचालय भी नहीं है?

प्रिंसिपल - हां, बहुत ज्यादा समस्या है।

रिपोर्टर - यहां पर चपरासी नहीं है क्या?

प्रिंसिपल - चपरासी नहीं है।

रिपोर्टर - बेल कौन बजाता है।

प्रिंसिपल - बच्चे बजा लेते हैं।

रिपोर्टर - स्कूल में कितने शिक्षक हैं?

प्रिंसिपल - अभी 11 शिक्षक हैं।

रिपोर्टर - कितने स्टूडेंट्स पढ़ते हैं।

प्रिंसिपल - अभी 250 स्टूडेंट्स हैं।