कब मिलेगी डर से आजादी

छेड़छाड़, बदसलूकी और रेप की घटनाएं करती परेशान

GORAKHPUR:

केस एक:

दोस्तों संग किया रेप, बनाया वीडियो

25 जुलाई को चिलुआताल एरिया की एक किशोरी को कमरे में बंधक बनाकर चार लोगों ने रेप किया. उसका वीडियो बनाकर प्रताडि़त करते रहे. मामला खुलने पर पंचायत में कीमत लेकर समझौते का दबाव बनाया. किशोरी की मां की सूचना पर पुलिस ने गैंग रेप का मामला दर्ज किया. इस प्रकरण को दबाने की कोशिश चलती रही.

केस दो:

शोहदे के डर से छोड़ दी पढ़ाई

तिवारीपुर एक किशोरी ने शोहदे के डर से स्कूल जाना बंद कर दिया. वह कोचिंग जाने से भी कतराने लगी. 11वीं में पढ़ने वाली छात्रा के पीछे पड़ा शोहदा बार-बार परेशान करता रहा. थकहाकर बेटी ने पिता को मामले की जानकारी दी. काफी प्रयास के बाद पुलिस ने जाहिदाबाद मोहल्ला निवासी ओवैदो रहमान को अरेस्ट किया.

केस तीन:

राह चलते लूट ली सोने की चेन

छह अगस्त को सोनौली हाइवे पर पत्नी संग गोरखपुर आ रहे सीआरपीएफ जवान की पत्नी के गले से बदमाशों ने सोने की चेन लूट ली. राह चलते हुई वारदात से सनसनी फैल गई. जवान की पत्‍‌नी संग वारदात पर पुलिस हरकत में आई.

शहर में अपराधियों पर लगाम कसने के सारे दावे फेल हो जा रहे हैं. एक तरफ पुलिस बदमाशों को पकड़कर जेल भेज रही तो दूसरी ओर अपराध कम नहीं हो रहे. किस गली-किस चौराहे पर किसके साथ क्या हो जाएगा. इस बात की आशंका घर से निकले लोगों को सताती रहती है. शहर में होने वाले अपराध के आंकड़े बताते हैं कि लोगों को डर से आजादी नहीं मिल पा रही. लूट, चेन स्नेचिंग, छेड़छाड़, रेप और महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा में कमी नहीं आ रही. 2017 गोरखपुर में 12 मर्डर, 62 रेप, 327 अपहरण, 20 छेड़छाड़ और 32 दहेज के हत्या के मामले दर्ज किए गए थे. पुलिस से जुड़े लोगों का कहना है कि हर पांचवें दिन रेप की एक घटना हुई. जबकि, अपहरण कर मर्डर, छेड़छाड़ सहित कई घटनाएं भी कम होने के बजाय बढ़ती चली गई. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर मामले को दर्ज किया जा रहा है.

इस तरह के अपराध की शिकार

घटना 2018 2017 2016 2015

मर्डर 15 12 14 29

रेप 73 62 69 71

शीलभंग 191 163 136 72

चेन छिनैती 16 10 08 08

दहेज हत्या 33 32 38 30

अपहरण 202 327 289 184

छेड़खानी 23 20 06 04

अन्य अपराध 280 314 228 143

भूल गए 250 से अिधक मामले

जिले में महिला अपराध के करीब ढाई सौ मामलों को पुलिस भूल गई थी. मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया. महिला अपराधों से संबंधित घटनाओं में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी. पूर्व एसएसपी ने पेडिंग पड़े मामलों की फाइल तलब की थी. लेकिन उनके तबादले के बाद थानेदार फाइलों को भूल गए. महिलाओं से संबंधित परिवारिक मामले सामने आने पर महिला थाना पर पंचायत कर मामला खत्म कराया जाता था. लेकिन थाने की पंचायत खत्म होने से घरेलू हिंसा के मामले समाप्त नहीं हो पा रहे हैं.

दर्ज नहीं करते मामले, दौड़ती रही पीडि़त

महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं में मुकदमा दर्ज करने में मुश्किल सामने आती है. शिकायत करने पर पुलिस किसी तरह से मामले को खत्म कराने का प्रयास करती है. चिलुआताल, झंगहा, गुलरिहा, खोराबार सहित कई थाना इसलिए बदनाम है कि वहां रेप, छेड़छाड़ और अन्य मामले दर्ज करने में लापरवाही की जाती है. पुलिस विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि करीब तीस फीसदी मामलों की शिकायत थाने तक पहुंचती ही नहीं, लोकलाज के डर से लोग शिकायत करने से परहेज करते हैं.