री-थिंक: जेंडर, कल्चर और सिनेमा विषय पर हुई बातचीत

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क्कन्ञ्जहृन्: सामाजिक संस्था ब्रेकथ्रू की ओर से होटल चाणक्या में शुक्रवार को महिलाओं और लड़कियों के विभिन्न मुद्दों पर मंथन हुआ. विषय था री-थिंक: जेंडर कल्चर और सिनेमा. सुप्रसिद्ध साहित्यकार पद्मश्री उषा किरण खान ने कहा कि समाज वैसा ही बनेगा जैसी राजनीति होगी. हमें समाज में लड़कियों को सम्मान के साथ-साथ, शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करने होंगे जिससे वे समर्थवान बनकर अपने रास्ते चुन सके और अपने अधिकारों के लिए लड़ सके. कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए सोहिनी भट्टाचार्य ने कहा कि हमें लड़कियों और महिलाओं को उनके अधिकार के बारे में बताना होगा.

अत्याचार के खिलाफ बोलें

समाजिक कार्यकर्ता सुप्रीत के सिंह ने कहा कि आज जरूरत है महिलाएं अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ खुलकर बोलें. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के कोशिश प्रोजेक्ट की शोधार्थी अपूर्वा विवेक ने कहा कहा कि जब बिहार के शेल्टर होम पर काम कर रही थी तब पाया कि अधिकतर बच्चियों की समस्या शादी है .अंकिता ने कहा कि लड़कियों की शादी की उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 साल करने की जरूरत है. जबकि अनिंदो बनर्जी ने योजनाओं को लेकर गंभीर मुद्दे उठाए. मोना सिन्हा, सुनीता मेनन, उर्वशी कौशिक, लीना सुशांत व पौलीन गोम्स ने भी अपनी बातें रखीं. दूसरे सत्र में नेशनल फिल्म अवार्ड से सम्मानित नितिन चंद्रा ने कहा आज भोजपुरी सिनेमा में अश्लीलता का बोलबाला है. लोक गायिका चंदन चंदन तिवारी ने कहा कि अश्लील गानों को बढ़ाकर पेश किया जा रहा है.