- एलयू में अनुशासनहीनता ही खबर से पीड़ा होती है

- आज प्रदेश में सबसे ज्यादा छात्राएं है उच्च शिक्षा में आगे

- एलयू में आयोजित हुआ 61वां दीक्षांत समारोह

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LUCKNOW : लखनऊ यूनिवर्सिटी का 61 वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को आयोजित हुआ. समारोह में चीफ गेस्ट के रूप में यूजीसी के चेयरमैन धीरेन्द्र पाल सिंह उपस्थित रहे. वहीं राज्यपाल रामनाईक ने दीक्षांत की अध्यक्षता की. उन्होंने 99 टॉपर्स को 192 मेडल व 31,793 स्टूडेंट्स को डिग्री प्रदान की. इसमें 11,416 छात्र और 21,793 छात्राएं शामिल हैं. राज्यपाल ने कहा कि यूनिवर्सिटी के दीक्षांत में शामिल होने मेरे लिए खुशी की बात है. शैक्षिक कैलेंडर में आज का दिन खास है. कुल 36 फीसदी छात्र व 64 फीसद छात्राओं को उपाधि दी गई. 78 प्रतिशत लड़कियों को मेडल मिला. वहीं, मजाक के लहजे में उन्होंने कहा कि यही हाल रहा तो आने वाले समय में मेडल के लिए छात्रों को आरक्षण मांगना पड़ेगा.

अनुशासनहीनता की खबर पर होती है पीड़ा

राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि 1920 में लखनऊ विवि की स्थापना हुई थी. मैं छात्रों से अनुशासन की अपील करता हूं. कोई अनुशासनहीनता की घटना कैंपस में होती है तो मुझे पीड़ा होता है. कोशिश करनी चाहिए की ऐसी घटनाएं दोबारा ना हों. ऐसी घटनाओं के बाद यूनिवर्सिटी ने जिस प्रकार को खुद को संभाला और सभी चीजों को मैनेज किया वह तारीफ के काबिल हैं.

प्रतिस्पर्धा की दौड़ में मूल्य ना छोड़ें- प्रो. डीपी सिंह

यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष प्रो. डीपी सिंह ने छात्रों को नसीहत देते हुए कहा कि आजकल अंधी दौड़ चल रही है. हर कोई आगे निकलने की होड़ में लगा है. उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को उद्योग से जोड़ने के लिए क्षेत्रीय विषमाताओं को दूर करना, शोध कार्यो के स्तर को बढ़ाना, सबको उच्च शिक्षा के मंत्र के साथ स्वयं पोर्टल पर मॉक पाठ्यक्रम उपलब्ध कराया जाना, स्वयं पढ़े स्वयं बढ़े की तर्ज पर दूरस्थ शिक्षा व ऑनलाइन पाठ्यक्रम में इजाफा कौशल विकास के लिए एकीकृत योजना, छात्रों के लिए बेहतर सपोर्ट सिस्टम बनाना जैसे अनेक बिंदुओं पर विचार किया जाना चाहिए. प्रो. सिंह ने कहा कि युवा हमारी पूंजी हैं. इनकी ऊर्जा से हमारा देश विश्व के मानचित्र पर अपना परचम फहरा रहा है.

छात्राओं ने डिग्री और मेडल में मारी बाजी

एलयू के 61वें दीक्षांत में इस बार भी लड़कियों ने मेडल से लेकर डिग्री तक अपने नाम कर बाजी मारी. एमएससी मैथ्स की छात्रा रहीं रक्षा देवी को सर्वाधिक 11 गोल्ड मेडल, एक ब्रांज मेडल और बुक प्राइज दिया गया जबकि एमए एआईएच की नम्रता दीक्षित को 9 गोल्ड मेडल मिले. वहीं 192 में से 149 मेडल लड़कियों को मिलें जबकि लड़कों को महज 43 मेडल ही दिए गये. इससे पहले दीक्षांत समारोह का आगाज शैक्षिक यात्रा से हुआ. कुलसचिव एसके शुक्ल की अगुवाई में शैक्षिक यात्रा सुबह करीब 10:15 बजे कला संकाय प्रांगण में पहुंची. यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति राज्यपाल राम नाईक की अनुमति के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ. वीसी प्रो. एसपी सिंह ने यूनिवर्सिटी की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की. इसके साथ ही समारोह में बैठे छात्रों, अभिभावकों का इंतजार खत्म हो गया और उपाधियों का वितरण शुरू किया गया.

कैलेंडर के साथ पुस्तकों का विमोचन

इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के कैलेंडर के साथ दो किताबों का भी विमोचन किया गया. वीसी प्रो. एसपी सिंह के दो वर्ष के कार्यकाल में उनके कायरें पर रचित पुस्तक कुलपति लखनऊ यूनिवर्सिटी की दो वर्षीय यात्रा और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर विशेष व्याख्यान श्रृंखला दीक्षा का विमोचन हुआ.

इन्हें मिले चांसलर मेडल

61वें दीक्षांत में प्रतिष्ठित चांसलर गोल्ड मेडल किसी को भी नहीं दिया गया. इसके अलावा वाइस चांसलर गोल्ड मेडल के लिए भी कोई योग्य छात्र नहीं मिला.

- आंचल सक्सेना - डॉ. चक्रवर्ती गोल्ड मेडल

- चेतन्या राठौर - चांसलर सिल्वर मेडल

- सचिन सिंह - चांसलर सिल्वर मेडल

- विभन्तिका द्विवेदी, यशी पांडेय, सुपर्णा पॉल, अनुकीर्ति शुक्ला, साहिला खातून, दीपक द्विवेदी, इशा सिंह, अनुराधा अनिल पांडेय, सुषमा कुशवाहा, प्रतिमा - चांसलर ब्रांज मेडल

इन्हें मिले सर्वाधिक मेडल

- रक्षा देवी - सर्वाधिक 11 मेडल, एक कांस्य, बुक प्राइज

- नम्रता दीक्षित - आठ गोल्ड मेडल, एक बुक प्राइज

- रमाशंकर मिश्रा - सात गोल्ड मेडल

- वर्तिका सिंह - छह गोल्ड मेडल

- संध्या - पांच गोल्ड मेडल

- शिवानी गुप्ता - छह गोल्ड मेडल

- टी महाश्वेता रैना - पांच गोल्ड मेडल

- राधा बंका - पांच गोल्ड मेडल

- निदा सिद्दीकी - पांच गोल्ड मेडल

- पंखुड़ी अग्रवाल - पांच गोल्ड मेडल