पहली बार ये क़ीमत 16 सौ डॉलर प्रति आउंस (भारत में लगभग 2.67तोला) को पार कर गई क्योंकि निवेशक सोने में निवेश करने में रुचि दिखा रहे हैं। इसके अलावा अमरीका में नेता सरकारी बजट घाटा कम करने की योजना पर अभी सहमति नहीं बना पाए हैं और ये भी इसमें एक कारक बन रहा है।

अगर अमरीकी संसद नए नियमों पर सहमत नहीं हो पाई तो अमरीका अपने ऋणों के मामले में दिवालिया हो सकता है। नए नियमों के बाद अमरीका को कर्ज़ पर और धन लेने में मदद मिलेगी।

यूरोप में बाज़ार से शुरुआती रुझानों में गिरावट ही दिखाई दी है। गुरुवार को यूरो मुद्रा वाले देशों के प्रमुखों की एक शिखर बैठक होने वाली है जिसमें ऋण से घिरे ग्रीस को बचाने के पैकेज पर चर्चा होगी।

ग्रीस के लिए पैकेज

जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्कल का कहना है कि वह निजी निवेशकों से स्पष्ट तौर पर प्रतिबद्धता चाहती हैं कि वे भी ग्रीस को बचाने के लिए पैकेज में हिस्सेदार होंगे। रविवार को उन्होंने इस शिखर बैठक को बेहद ज़रूरी बताते हुए कहा था कि इसका कोई न कोई परिणाम निकालना ही होगा।

यूरोपीय केंद्रीय बैंक- ईसीबी के प्रमुख ज्याँ क्लॉ त्रिके ने सभी देशों से मिलजुलकर काम करने की अपील की और कहा कि इस ऋण संकट से वे मिलकर ही निकल सकते हैं।

वैसे जिस तरह से निवेशक सोने की ओर भाग रहे हैं वह सामान्य ही है क्योंकि दुनिया में आर्थिक संकट के समय में आम तौर पर निवेशक सोने में निवेश को ही सुरक्षित उपाय मानते हैं।

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