अब तक हुई मानसून की वर्षा से पिछले साल की तुलना में खरीफ यानी गर्मी की फसल की बेहतर बुवाई की खबरें आ रही हैं। ये पिछले वर्ष से करीब 62 फीसद ज्‍यादा बताई जा रही है जो एक अच्‍छी खबर है। अगर सरकारी आंकड़ों की मानें तो 563.35 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में अब तक खरीफ की फसलों की बुवाई हो चुकी है जो पिछले साल के आंकड़ों से दूगने से ज्‍यादा है। बुवाई की र फ्तार को देखते हुए लगता है चालू मानसून अगर इसी तरह चलता रहा तो इस वर्ष फसल का आंकड़ा 2013 के स्‍तर को छू लेगा। उस साल मानसून बेहद अच्‍छा रहा था और सामान्‍य से करीब 6 फीसद ज्‍यादा वर्षा हुई थी। खरीफ फसलों की अब तक लगभग 34 फीसदी बुवाई हो गई है। उसमें सबसे अच्छा काम दलहन और तिलहन की फसलों की बुवाई में हुआ है।

अब उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक पखवाड़े में बुवाई कार्य पूरा हो जाएगा। इसबार लक्ष्य से अधिक बुवाई होने की संभावना है। इस समय मौसम मेहरबान है। लगातार हो रही वर्षा से किसानों के चेहरे खिल गए हैं और उन्होंने जोर-शोर से बुवाई शुरू कर दी हैं। यदि मानसून और बुवाई इसी गति से चलते रहे, तो करीब एक पखवाड़े से भी कम समय में बुवाई कार्य पूरा होने की उम्मीद है।

खरीफ फसलों की बुआई के लिए जुलाई का महीना अव्वल होता है। जिसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की आवश्यकता रहती है। जुलाई की शुरूआत में हुई बरसात ने खेती के लिए सुधार कर दिया है। जबकि पिछले पांच सालों में 2012 को छोड़ इस वक्त बारिश के लिए आकाश की टकटकी लगानी पड़ती थी। परंतु भगवान इंद्र की समय से हुई मेहरबानी ने अच्छी खेती की संभावना जगा दी है।

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