- शहर में लगभग 500 होटल और मैरेज हॉल, टूरिज्म डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में सिर्फ 135

- अग्निशमन विभाग के पास भी नहीं है ब्यौरा, एनओसी के लिए लेटर लिखने पर भी नहीं सुनते संचालक

Gorakhpur@inext.co.in
GORAKHPUR: दिल्ली के होटल में हुई अगलगी जैसा हादसा कभी भी गोरखपुर में हो सकता है. सिटी के चुनिंदा होटलों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर होटल, रेस्टोरेंट्स व मैरेज हॉल आग लगने की स्थिति में अपने कस्टमर्स की जान बचाने में सक्षम नहीं हैं. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट टीम ने शहर के होटल्स में आग से सुरक्षा के इंतजामों की पड़ताल की तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है. हॉर्ट ऑफ सिटी के लगभग दर्जनभर होटल्स के अलावा कहीं भी आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. यही वजह है कि ज्यादातर संचालकों ने विभागों से एनओसी के लिए अप्लाई ही नहीं किया है. हद तो ये कि शहरभर में मौजूद कुल लगभग 500 होटल्स और मैरेज हॉल में महज 135 ही टूरिज्म डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में दर्ज हैं. जबकि अग्निशमन विभाग में तो इनका ब्यौरा ही दर्ज नहीं है. हालांकि अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था और एनओसी के लिए पर्यटन विभाग संबंधित को पत्र लिखता भी है तो होटल संचालक जबाव तक नहीं देते.

बनी रहती हादसे की संभावना
हमारी पड़ताल में पता चला है कि शहर के ज्यादातर होटल्स में फायर सेफ्टी के मानकों से धड़ल्ले से खिलवाड़ किया जा रहा है. यहां न तो आग बुझाने के लिए पुख्ता इंतजाम हैं और न ही सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था. ज्यादातर होटल-रेस्टोरेंट नियम-कायदों को ताक पर रख चल रहे हैं. ऐसे में अगर यहां आग लगी तो बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

शो-पीस हैं अग्निशमन यंत्र
होटलों में बार-बार हो रही अगलगी की घटनाओं के बाद भी होटल संचालकों ने कोई सबक नहीं लिया है. शहर में लगभग 500 होटल संचालित किए जा रहे हैं लेकिन टूरिज्म डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में 135 ही होटल-रेस्टोरेंट दर्ज हैं. शहर के कुछ बड़े होटल्स को छोड़ दिए जाए तो ज्यादातर होटलों व मैरेज हाउस मे लगे अग्निशमन यंत्र सिर्फ शो-पीस बनकर रह गए हैं. इन होटल व मैरेज हाउस में फायर सेफ्टी के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं.

50 फीसदी ने नहीं ली एनओसी
वहीं, अग्निशमन विभाग के पास तो शहर में होटल व मैरेज हाउस की डिटेल तक नहीं है. जानकारों के मुताबिक करीब 50 फीसदी होटल संचालकों ने एनओसी नहीं लिया है. पर्यटन विभाग के मुताबिक इसे लेकर पत्र लिख सभी होटलों, रेस्टोरेंट और मैरेज हाउस में फायर सेफ्टी मानक के साथ-साथ संचालकों व स्टाफ के लिए मॉक ड्रिल कराने की बात भी कही गई थी लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है.

किचन में नहीं हैं अग्निशमन यंत्र
कई होटल और रेस्टोरेंट और मैरेज हाउस घनी आबादी के बीच स्थित हैं. इन होटल, रेस्टोरेंट और मैरेज हाउस में खुलेआम गैस सिलेंडर को चूल्हे के पास रखकर खाना बनाया जाता है. लेकिन यहां अग्निशमन यंत्र तक की व्यवस्था नहीं होती है. यहां आग से बचाव के लिए अन्य उपायों पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा. ऐसे में अगर आग लग जाए तो बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती है.

दिल्ली में लगी आग, गोरखपुर में मजबूत तैयारी
दिल्ली स्थित एक होटल में अगलगी के बाद गोरखपुर फायर डिपार्टमेंट ने अग्निशमन यंत्र के साथ सभी तैयारियां और पुख्ता कर ली हैं. साथ ही टीम को अलर्ट कर दिया गया है कि इस तरह की कोई भी आग लगने की सूचना मिलती है तो तत्काल रवाना हों. शहर में करीब एक दर्जन बड़े मल्टीस्टोरी होटल हैं. उनमें आग लगने की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है. ये सभी घनी आबादी के बीच स्थित हैं. ऐसी स्थिति से काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग के पास एक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध है. इसके सहारे भीषण आग पर काबू पाया जा सकता है.

फैक्ट फिगर

शहर में होटल, रेस्टोरेंट व मैरेज हाउस - लगभग 500

- पर्यटन विभाग के रिकार्ड में दर्ज होटल - 135

शहर के होटल संचालकों ने नहीं ली है एनओसी - 50 प्रतिशत

अग्निशमन विभाग के पास संसाधन

एमएफवी टाइप बी छोटा - 3

वाटर टेंडर - 4

वाटर बाउजर - 2

फोन टेंडर- 1

हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म - 1

वाटर मिस्ट हाईपे्रशर - 4

मुख्य शमन अधिकारी - 1

दरोगा - 1

लीडिंग फायरमैन -15

फायर सर्विस चालक -14

फायरमैन - 58

वर्जन

बिजली विभाग और अग्निशमन विभाग को पत्र लिखा गया है कि वह शहर के होटल, रेस्टोरेंट और मैरेज हाउस का सर्वे कर कमियों का दूर कराएं. यदि कोई ऐसा नहीं करता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

- रविंद्र कुमार, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी

होटल, रेस्टोरेंट और मैरेज हाउसों का रिकॉर्ड संबंधित विभाग के पास होता है. बार-बार संचालकों को नोटिस दी जाती है लेकिन वह एनओसी नहीं लेते हैं. जब विभाग से आदेश आता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है.

- रणजीत सिंह, अग्निशमन प्रभारी