-बीआरडी मेडिकल कॉलेज ने भर्ती करने से किया था इनकार, कुशीनगर जिला अस्पताल में भर्ती हैं बुजुर्ग

GORAKHPUR: देवरिया बालिका गृह केस में एक तरफ शासन कड़ी कार्रवाई करने के मूड में है. वहीं, दूसरी तरफ पिछले वर्ष ऑक्सीजन कांड से चर्चा में रहा बीआरडी मेडिकल कॉलेज अपना रवैया बदलने को तैयार नहीं है. वृद्धा आश्रम से इलाज के लिए बीआरडी भेजे गए जिन 22 बुजुर्गो को बीआरडी प्रशासन ने बिना इलाज के दवा देकर गुरुवार शाम को लौटा दिया था, उनकी हालत रास्ते में ही गंभीर हो गई. रात करीब 8 बजे मरीज बेहोश हो गए. इसमें छह की स्थिति शुक्रवार दोपहर बिगड़ गई. इन सबको बीआरडी की घोर लापरवाही के बाद कुशीनगर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

यहां मानसिक रोगियों का नहीं होता इलाज

कुशीनगर के कसया समाज कल्याण वृद्धा आश्रम के प्रबंधक दिनेश मिश्रा ने बताया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. गणेश कुमार से 22 बुजुर्गो की गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए भर्ती करने के लिए कहा था. लेकिन उन्होंने यह कहकर लौटा दिया कि यह मेडिकल कॉलेज हैं, यहां पढ़ाई होती है. मानसिक रोगियों का इलाज नहीं होता है. इससे रात में ही मरीजों को कुशीनगर ले जाने के दौरान रास्ते में ही कई बुजुर्ग मरीज बेहोश हो गए. 12 बजे सात महिलाओं और एक पुरुष को कुशीनगर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. सुबह होते-होते छह और बुजुर्गो को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

12 मानसिक रोगी

कुशीनगर जिला समाज कल्याण अधिकारी टीके सिंह ने बताया कि 12 मरीज मानसिक रोगी है. इन्हें बेहतर इलाज के लिए बरेली या आगरा में मानसिक चिकित्सालय शिफ्ट करने के लिए आला अफसरों से बात चल रही है. चार मरीज बिल्कुल ठीक हैं.

वर्जन

गुरुवार देर रात आठ मरीजों को भर्ती कराया गया था. सुबह छह की हालत खराब होने के बाद उन्हें भर्ती करना पड़ा. कई मरीज मानसिक रूप से बीमार हैं. इन्हें बेहतर इलाज के लिए जल्द अच्छी जगह शिफ्ट करने की जरूरत है.

डॉ. हरी चरन सिंह, सीएमओ कुशीनगर