-गोरखपुर की रहने वाली मुदिता ने शुरू किया अनोखा स्टार्टअप

-यूपी में साथ न मिलने की वजह से राजस्थान में बनाया ठिकाना

-दो हजार को मिला है रोजगार, वहीं लगातार बढ़ रही है संख्या

-पहले रिसर्च, फिर इस इंडस्ट्री में खुद की बनाई अलग पहचान

GORAKHPUR: वेस्टेज की भरमार, लेकिन इसके डिस्पोजल का कोई ऑप्शन नहीं. इन वेस्टेज की वेरायटी भी कम नहीं है जिसकी वजह से जिम्मेदार किसी एक पर फोकस कर उसके प्रॉपर डिस्पोजल की व्यवस्था नहीं बना पाते. मगर शहर में पैदा हुई, पली-बढ़ी और यहीं से प्राइमरी एजुकेशन हासिल करने वाली मुदिता ने शहर ही नहीं देश में सबसे ज्यादा निकलने वाले चिकन फेदर वेस्ट को डिस्पोज कर उन्हें 'गोल्डन' पहचान दिलाने में अहम रोल प्ले किया है. मुदिता अब दो हजार लोगों को रोजगार दे रही हैं, वहीं वॉटर पॉल्यृशन का कारण बन रहे इन वेस्ट का प्रॉपर डिस्पोल भी कर रही हैं.

पकड़ी टेक्सटाइल डिजाइिनंग की राह

गोरखपुर के मैत्रीपुरम की मुदिता ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई कार्मल ग‌र्ल्स इंटर कॉलेज से की. इसके बाद टेक्साइटल डिजाइनिंग की बारीकियां सीखने के लिए उन्होंने जयपुर का रुख किया और वहां आईआईसीडी से अपना कोर्स कंप्लीट किया. प्रोजेक्ट के तौर पर उन्हें वेस्ट मैटेरियल से सस्टेनेबल प्रॉडक्ट बनाने का टास्क मिला, जिसके लिए उन्होंने कड़ी रिसर्च की और उसके बाद मुर्गे से निकलने वाले फेदर वेस्ट को चुना. प्राइमरी स्टेज में उन्होंने इसे सेनिटाइज कर कालीन बनाने की प्रैक्टिस शुरू की और अपना प्रोजेक्ट सब्मिट कर दिया.

इसको ही बनाया बिजनेस

कोर्स कंप्लीट करने के बाद मुदिता ने रिसर्च जारी रखी. इसमें उनके पति राधेश ने बाखूबी साथ निभाया और तन-मन-धन से मदद की. मुदिता की स्टडी में यह बात सामने आई कि मुर्गे के जो पंख है, इनके इनर सेल से बायोगैस और पार्टिलाइजर बन रहे हैं, जबकि बाकी बचे हुए मैटेरियल्स से रुई मिल रही है. मुदिता ने इसे हैंडस्पिन कराकर धागा बनाने की शुरुआत की और इसका पेटेंट भी कराया. अब 50 मीटर का धागा सारी प्रॉसेस के बाद दो दिन में बन जाता है. अब हैंडलूम में इनका इस्तेमाल कर इनसे हैंडलूम आइटम्स बनाए जा रहे हैं, जो काफी ड्यूरेबल हैं.

महोत्सव में भी एडवांस बुकिंग

मुदिता ने गोरखपुर महोत्सव में भी स्टाल लगा रखी है. इसमें उनके सामान को लोग काफी पसंद कर रहे हैं और यह हाथों-हाथ सेल हो रहे हैं. सामान की शार्टेज होने की वजह से कुछ लोगों ने तो एडवांस बुकिंग भी करा ली है. इनके सबसे खास आइम में मफलर और शॉल है, जो टोटली फेदर वाले धागों से बनाए गए हैं. मफलर की सॉफ्टनेस का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह फिंगर रिंग से आसानी से निकाला जा सकता है. वहीं शॉल को दो एक्सप‌र्ट्स ने 34 दिन मेहनत कर बनाया है. वहीं अब किड्स कार्पेट, क्विल्स और मैट्रस भी बनाने की तैयारी की जा रही है.