- गोरखपुर डिपो के पास मौजूद 98 बसों में से 10 हो चुकी हैं कबाड़

- डिपो में ही रहती हैं खड़ी लेकिन जिम्मेदारों ने नहीं कराई नीलामी

GORAKHPUR: यात्रियों की सुविधा के बड़े-बड़े दावे करने वाले गोरखपुर रोडवेज की हर व्यवस्था ध्वस्त है. लापरवाही का आलम ये कि खटारा होती बसों की स्थिति पर ध्यान देना तो दूर, कबाड़ हो चुकी बसों तक को जिम्मेदार कागजों में बाकायदा दौड़ाए जा रहे हैं. जबकि हकीकत में यह बसें डिपो के वर्कशाप में ही खड़ी हैं. वहीं, अनुबंधित बसों की संख्या बढ़ाने में भी रोडवेज के जिम्मेदार पिछले एक साल से हीलाहवाली ही करते नजर आ रहे हैं.

कागज में 98 बसें, सड़क पर 88

बता दें, यूपी रोडवेज गोरखपुर रीजन में कुल 745 बसें संचालित होती हैं. इनमें से केवल गोरखपुर डिपो में 94 अनुबंधित व 98 परिवहन निगम की बसें हैं. परिवहन निगम की 98 बसों में 10 पूरी तरह कबाड़ हो चुकी हैं. लेकिन हैरानी वाली बात है कि ये बसें आज भी कागजों में दौड़ रही हैं. जबकि नियमत: इन बसों की नीलामी करा दी जानी चाहिए थी. लेकिन डिपो प्रबंधन द्वारा कई बार आलाधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद ऐसा नहीं किया गया. नतीजा ये कि गोरखपुर रोडवेज जहां 10 बसों की कमी झेल रहा है. वहीं, कागजों में 98 बसें संचालन में होने से नई बसें मिलना भी मुमकिन नहीं होने वाला.

ड्राइवर्स की कमी से जूझतीं बाकी बसें

कबाड़ हो चुकी बसों की नीलामी न होने के पीछे रोडवेज के अधिकारियों का कहना है कि खरीदार न मिलने के कारण नीलामी नहीं हो सकी है. जबकि यूपी रोडवेज को इन दस बसों के नीलामी होने से दूसरी दस नई बसें मिल सकती हैं जो रूट पर चलकर सवारी ढोने में बेहतर अर्निग दे सकती हैं. लेकिन इसके लिए आरएम व एसएम स्तर पर पहल नहीं की गई है. वहीं, परिवहन निगम की जो बाकि 88 बसें हैं, वे भी ड्राइवर्स की कमी के चलते पूरी तरह संचालित नहीं हो पाती हैं जिसका सीधा प्रभाव रोडवेज की आय पर पड़ रहा है.

अनुबंधित बसें भी जस की तस

अनुबंधित बस ओनर्स एसोसिएशन के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद पांडेय बताते हैं कि दस महीने हो चुके हैं लेकिन गोरखपुर से विभिन्न मार्ग पर बसों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ है. नई बसों के आने से इतनी समस्या नहीं होती. आलम यह है कि हर रूट पर बसों के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को आज भी प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ता है. वे बताते हैं कि गोरखपुर मुख्यालय से ग्रामीण अंचल में बसों के संचालन के लिए जिन रूट्स का चयन किया गया था उनसे रेवन्यू नहीं मिला. जबकि ऐसे रूट्स का चयन होना चाहिए था जहां बसों की ज्यादा डिमांड है. इसके अलावा बस मालिकों को साल 2013 से मंहगाई भत्ता तक देय नहीं हुआ. जबकि हर तीन साल पर भत्ता बढ़ाने का नियम है.

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रात आठ बजे के बाद नहीं मिलती बस

बसों के अभाव के कारण रात आठ बजे के बाद गोरखपुर से बमुश्किल ही बसें मिलती हैं जबकि गोरखपुर रोडवेज ए ग्रेड का स्टेशन है. गोरखपुर डिपो प्रबंधन की उदासीनता के कारण शाम ढलते ही संचालन कक्ष में न तो कर्मचारी रहते हैं और न ही कोई जिम्मेदार.

इन लोकल रूट्स पर है बसों की ज्यादा डिमांड

- तमकुही रोड

- बांसी

- सिद्धार्थनगर

- पड़रौना

- ठूठीबारी

- महाराजगंज

- रुद्रपुर

वर्जन

गोरखपुर डिपो में कुल 98 बसें हैं. इनमें से दस बसें कबाड़ हो चुकी हैं जो रूट पर चलने लायक नहीं है. लेकिन नीलामी न होने के कारण आज भी कागज में चल रही हैं. जल्द ही नीलामी कराई जाएगी.

- केके तिवारी, एआरएम गोरखपुर डिपो