-सिर्फ यूनिवर्सिटी कैंपस में 52 किस्म के पेड़ हैं मौजूद

-इसमें करीब डेढ़ दर्जन मेडिसिनल क्वालिटी रखने वाले पेड़ हैं मौजूद

GORAKHPUR: दवाओं का कारोबार लगातार बढ़ रहा है. एक से बढ़कर एक कंपनियां दस्तक दे रही हैं और डॉक्टर्स भी उनकी दवाएं धड़ाधड़ प्रिफर कर रहे हैं. दवाएं बनाने में पेड़ों से सबसे बड़ी मदद मिल रही है. इनकी मेडिसिनल प्रॉपर्टी और क्वालिटी की वजह से कुछ पेड़ों का अस्तित्व भी खतरे में आ गया है. गोरखपुर यूनिवर्सिटी कैंपस भी हरा-भरा है और यहां भी लोगों को जिंदगी देने वाली कई 'संजीवनी' मौजूद हैं. मगर पेड़ों की भीड़ में उनकी पहचान आसान नहीं है. लेकिन यूनिवर्सिटी में ही बतौर एनपीडीएफ वर्क रहे डॉ. शोभित श्रीवास्तव उर्फ डॉ. टैक्सो ने बायोटेक डिपार्टमेंट के डॉ. जोनाडा एवी प्रसादा राव की देखरेख में कैंपस में मौजूद संजीवनी का स्कैन कर डाला है. उन्होंने स्टडी में यह पता किया है कि गोरखपुर यूनिवर्सिटी में कितने तरह के पेड़ हैं और किसमें मेडिसिनल क्वालिटी है.

डेढ़ दर्जन पेड़ों में है खास बात

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में यूं तो सैकड़ों पेड़ देखने को मिल जाएंगे, लेकिन अगर कोई कहे कि यहां कितनी तरह के पेड़ मौजूद है, तो शायद पेड़ लगाने वाले जिम्मेदार भी इसे न बता सकें. लेकिन हाल ही में यूनिवर्सिटी ज्वाइन करने वाले डॉ. टैक्सो ने महज एक माह में ही यूनिवर्सिटी का चप्पा-चप्पा छान मारा है. इसमें यह बात सामने आई है कि यूनिवर्सिटी में 52 प्रजातियों के पेड़ मौजूद हैं, जिनमें से करीब डेढ़ दर्जन पेड़ मेडिसिनल क्वालिटी वाले हैं.

नीम-पीपल के साथ्ा जामुन भी

यूनिवर्सिटी में यूं तो चार दर्जन से ज्यादा पेड़ों की किस्में हैं, लेकिन मेडिकल क्वालिटी रखने वाले पेड़ों की तादाद लिमिटेड हैं. इसमें आम तौर पर जाना-जाने वाला नीम और पीपल तो मौजूद है ही, वहीं डायबिटीज में बेहतर रिजल्ट देने वाला जामुन भी यूनिवर्सिटी कैंपस में मिल जाएगा. इतना ही नहीं चंदन, हरसिंगार और रीठा के पेड़ भी यहां मौजूद हैं. इसके अलावा कई और अहम पेड़ हैं, जो मेडिसिनल प्रॉपर्टीज रख्ाते हैं.

यह पेड़ हैं मेडिसिनल क्वालिटी -

सीता अशोक

पीपल

बरगद

कचनार

सहजन

सिरिस

शीशम

जामुन

चिलबिल

इमली

आम

नीम

मौलसरी

अमरूद

चंदन

हर सिंगार

रीठा

बॉक्स -

क्यों डॉक्टर 'टैक्सो'?

डॉ. शोभित श्रीवास्तव यूनिवर्सिटी में अभी वर्क कर रहे हैं, लेकिन यह अपने कॉलेज टाइम से ही डॉक्टर टैक्सो के नाम से मशहूर हो चुके हैं. सेंट एंड्रयूज से यूजी फिर पीजी और पीएचडी करने के दौरान टैक्सोनॉमी की इन्हें ऐसी नॉलेज हुई कि अब वह छोटे से छोटा पौधा हो या कोई भी पेड़, उसको देखकर ही उसकी कुंडली आसानी से बता सकते हैं. बॉटनिकल नेम के साथ ही उसकी फैमिली और बाकी जरूरी इंफॉर्मेशन भी डॉ. टैक्सो चुटकियों में बता सकते हैं. यही वजह है कि पौधों की पहचान के लिए अभी भी उन्हें कॉलेज की ओर से बुलाया जाता है.