GORAKHPUR: सपने दिखाकर इलेक्शन में अपना काम निकालने वाले नेताओं को इस बार हम नहीं बक्शेंगे। जिसके पास कुछ करने का दम और योग्यता होगी उसी को हम अपना कीमती वोट देंगे। इस बात को नेताओं को भी समझना होगा कि पब्लिक को एक ही बार मूर्ख बना सकते हैं। उसके बाद जब फिर वापस पब्लिक के पास आएंगे तो उन्हें भी लोग बाहर का रास्ता दिखाएंगे। इन बातों के साथ कई और कड़क मुद्दों पर बिजनेसमैन और पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स ने दैनिक जागरण आई नेक्स्ट और रेडियो सिटी की ओर से ऑर्गनाइज्ड राजनी-टी में आरजे प्रतीक के सामने बेबाकी से अपनी बात रखी। गोरखनाथ ओवरब्रिज के नीचे स्थित 40 साल पुराने टी स्टॉल पर आए यूथ्स ने शिक्षा, हेल्थ, भ्रष्टाचार, रोजगार समेत कई कड़क मुद्दों पर अपनी राय रखी।

सरकारी नौकरी के पीछे भाग रहे लोग

राजनी-टी में धीरेन्द्र तिवारी ने कहा कि बेरोजगारी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण लोगों की मानसिकता है। आज भी यूथ्स सरकारी नौकरियों के पीछे अपना पूरा जीवन बर्बाद कर ले रहे हैं। अगर इनकी अच्छे से काउसलिंग कर इन्हें खुद से खड़े होने के टिप्स दिए जाएं तो बेरोजगारी कम हो सकती है। बिजनेस चाहे छोटा हो या फिर बड़ा उसे शिद्दत से अगर किया जाए तो इससे भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। सरकार को भी इस दिशा में काम करने की जरूरत है।

वुमंस को मिले अधिकार

गोविंद श्रीवास्तव ने वुमंस की प्रॉब्लम को शेयर किया। कहा कि सरकारी हो या फिर प्राइवेट जॉब, हर जगह लेडीज स्टॉफ को आज भी एक अलग नजर से देखा जाता है। जबकि, आज के इस मंहगाई के दौर में पति और पत्नी दोनों को अपने पैर पर खड़ा होना बेहद जरूरी है। कई जगहों पर तो अच्छी पढ़ाई के बाद भी शादी के बाद महिलाएं चाह कर भी ससुराल के अंकुश की वजह से नौकरी नहीं कर पाती हैं। सरकार को चाहिए कि कुछ ऐसा करे कि लड़का और लड़की का भेद खत्म हो जाए।

महंगी शिक्षा पर लगे अंकुश

यूथ्स को शादी के बाद जिन प्रॉब्लमों से रूबरू होना पड़ता है उसे विजय यादव ने बेबाकी से बताया। संजय ने कहा कि प्राइवेट जॉब में सैलेरी जितनी भी मिले, लेकिन शादी के बाद कम पड़ती है। इसका मेन रीजन यह है कि इसके बाद परिवार बढ़ जाता है। इससे बच्चे की अच्छी पढ़ाई की भी चिंता सताती है। स्कूलों की मनमानी की वजह से अब शिक्षा इतनी महंगी हो गई है कि इसको पूरा करने में लोगों का दम फूलने लग रहा है। सरकार भी मनमानी फीस वसूलने पर लगाम नहीं लगा पा रही है।

जनसंख्या वृद्धि पर लगाएं रोक

चर्चा के दौरान भाष्कर श्रीवास्तव ने कहा कि मुझे बिजनेस के साथ देश की बढ़ती जनसंख्या सबसे बड़ी समस्या लगती है। देश के नेता वोट बैंक के चक्कर में जनसंख्या वृद्धि को अपने एजेंडे में शामिल नहीं करते हैं। पहले जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए दीवारों पर स्लोगन 'हम दो, हमारे दो' लिखकर लोगों को जागरूक भी किया जाता था। अब तो वो भी सरकार नहीं करती।

जवानों के कौशल पर न करें शंका

संजय ने बहुत उबलते मुद्दे को बेबाकी से उठाया। कहा कि जब हम चैन से सोते हैं तब बॉर्डर पर हमारे देश के जवान रात भर जाग कर लोगों की रखवाली करते हैं। इसके बाद भी अपने ही देश के अंदर कई लोग चंद रुपयों के लिए वतन के साथ गद्दारी करने से जरा नहीं कतराते हैं। सरकार चाहे जो भी हो वो अगर देश हित में नहीं सोचेगी तो हम लोग भी उनके बारे में सोचना बंद कर देंगे। एक बात और जरूरी है कि देश के अंदर छुपे भेदियों को अब खोजना होगा और उन पर कार्रवाई करनी होगी।

मेरी बात

देश के नेताओं के बीच का मतभेद आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। अपनी पार्टी का हित सोचने वाले नेता अब आतंकवाद पर भी गलत बयानबाजी कर दहशतगर्दो के हितैषी बन रहे हैं जो देश के लिए खतरे की घंटी है। सरकार चाहे जो हो उसे आतंक के मुद्दे पर एक होना होगा। तभी अराजक तत्वों पर अंकुश लग पाएगा।

अभिनव चित्रांश

कड़क मुद्दा

सिटी में हॉस्पिटल्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इनकी संख्या बढ़ने के साथ डॉक्टर की फीस में कोई कमी नहीं आ रही है। लाचार और बीमारों का यहां पर शोषण किया जा रहा है। सरकार को इसके लिए उचित कदम उठाना चाहिए। जिससे डॉक्टरों की मनमानी पर अंकुश लग सके।

सतमोला खाओ, कुछ भी पचाओ

देश में टैलेंट की कमी नहीं है। कमी है तो इन्हें तराशने वालों की। देश के पढ़े लिखे युवा समय से जॉब नहीं मिलने के कारण गलत रास्ता अख्तियार कर ले रहे हैं, जो आगे चलकर देश के लिए बहुत खतरनाक साबित होगा। देश के युवा भटकें ना, इसके लिए उनकी काउंसलिंग कर उन्हें समय-समय पर अवेयर करते रहना चाहिए।

मिला सतमोला गिफ्ट हैंपर

राजनी-टी में सबसे बेबाकी से अपनी बात रखने के लिए विजय यादव को सतमोला की ओर से गिफ्ट हैंपर दिया गया। सभी ने ताली बजाकर उनका मनोबल बढ़ाया। विजय ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की वर्षो तक तैयारी के बाद भी युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है। बीटेक, एमबीए, पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद भी यूथ्स नौकरी की लाइनों में लगकर धक्के खाने पर मजबूर हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को तय समय में पूरा करवाने के लिए कोई ठोस कानून बनाने की जरूरत है। जिससे नौकरी भले न मिले लेकिन कम से कम समय बीत जाने के बाद यूथ्स दूसरी नौकरियों की तैयारी में तो जुट जाएगा। नौकरियों के फॉर्म तो सैकड़ों में आ रहे हैं लेकिन बहुत कम ऐसे होते हैं जिनकी प्रक्रिया पूरी होती है।

कोट्स

प्राइवेट जॉब में आज भी यूथ्स अनसेफ फील करते हैं। इसका मेन कारण कंपनियों का तानाशाही वाला रवैया है। इसके लिए सरकार को कुछ करना चाहिए।

धीरेन्द्र तिवारी

सिटी तो स्मार्ट बन रही है। यहां पर अब बड़ी-बड़ी कंपनियां भी आना चाह रही हैं। वो दिन दूर नहीं है, जब यूथ्स के पीछे जॉब दौड़ेगी।

गोविंद श्रीवास्तव

जनसंख्या वृद्धि बेरोजगारी का सबसे बड़ा कारण है। इसके बाद भी कोई भी सरकार इसे अपने ऐजेंडे में शामिल नहीं करती है। ये बहुत दुखद है।

भाष्कर श्रीवास्तव

बिजनेस की प्रॉब्लम को भी सरकारें थोड़ा सीरियसली टेकअप करतीं तो लोग इस क्षेत्र में भी आसानी से आते। जीएसटी जैसा नियम बनाया गया, लेकिन इसके लिए किसी को भी ठीक से अवेयर नहीं किया गया। बहुत से लोग इस वजह से भी बिजनेस से किनारा करते हैं।

अजीत प्रताप सिंह

यूथ्स को अवेयर करना होगा। क्योंकि आज भी यूथ्स सरकारी नौकरी के पीछे भाग रहे हैं। जबकि बिजनेस और प्राइवेट सेक्टर में काम कर भी बहुत कुछ किया जा सकता है।

शिवम जायसवाल

लेडीज स्टॉफ को लेकर आज भी लोगों की सोच अच्छी नहीं हो पाई है। जबकि, प्राइवेट सेक्टर में देश की कई महिलाओं ने अपने बलबूते बड़ा मुकाम हासिल किया है।

संजय यादव

बिजनेस के क्षेत्र में भी सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि टैलेंटेड लोग लोन लेकर बिजनेस कर सके। आज जो लोन मिलता है तो उसकी फॉर्मेल्टी को ही पूरा करने में कई दिन निकल जाते हैं। इस प्रॉसेस को और आसान करना होगा।

ऋषभ यादव

पढ़ाई के बाद युवा जॉब की तलाश में देश-विदेश भटक रहे हैं। इन्हें अगर अपने देश में ही अच्छा अवसर मिले तो इनके पलायन पर रोक लग सकती है। ये देश के लिए अच्छा काम भी कर सकेंगे।

अकबर अली