- सभी वार्डो में हाउस सर्वे करा रहा नगर निगम

- सर्वे के बाद सभी मकानों को अलॉट किए जा रहे नंबर

- 50 रुपए की पैरवी के लिए मेयर को कर रहे फोन

केस-1

हेलो मेयर साहब..एक आदमी मकान का सर्वे करने के नाम पर 50 रुपए मांग रहा है. वह कई डिटेल भी मांग रहा है. हम तो हाउस टैक्स, वाटर टैक्स सभी कुछ जमा करते हैं फिर यह पैसे किस बात के लग रहे हैं. रमन ने सर्वेयर के सवालों के जवाब तो आराम से दिए लेकिन पैसे की बात आते ही नाराजगी जाहिर करते हुए मेयर को फोन लगा दिया. मेयर ने जब समझाया कि यह शुल्क निगम की ओर से निर्धारित किया गया है तब जाकर रमन शांत हुए.

केस-2

सुनीता के घर पर मकान के सर्वे के लिए गए कर्मचारी ने जब इसके एवज में 50 रुपए की डिमांड की तो उन्होंने इसकी शिकायत पार्षद से की. उन्होंने सवाल किया कि हम सभी तरह के टैक्स जमा कर रहे हैं फिर यह 50 रुपए किस बात के लिए जा रहे हैं. पार्षद के समझाने के बाद उन्होंने पैसे जमा किए और फिर डिटेल भी साझा की.

GORAKHPUR: नगर निगम की ओर से हाउस टैक्स का दायरा बढ़ाने के लिए कराए जा रहे सर्वे में कई तरह की अड़चनें आ रही हैं. हाल के दिनों में नगर निगम एरिया में बढ़े मकानों की संख्या की सही जानकारी के लिए नगर निगम सर्वे करवा रहा है. सर्वे कर रही कंपनी के कर्मचारी निगम एरिया के मकानों में जाकर घर का क्षेत्रफल, मकान की ऊंचाई, कमरों की संख्या, परिवार के मुखिया आदि की जानकारी इक्ट्ठा कर रहे हैं. इसके बाद सर्वे करने वाले कर्मचारी मकान के बाहर एल्युमिनियम की नंबर प्लेट लगाता है. इस के बदले निगम की ओर से कंपनी 50 रुपए का शुल्क लेती है. लेकिन कुछ लोगों को यह देना भी गंवारा नहीं हो रहा है. लोग इसके लिए मेयर तक से शिकायत कर रहे हैं.

मेयर तक पहुंचती है शिकायत

रमन व सुनीता ही नहीं शहर के कई लोग कर्मचारियों द्वारा 50 रुपए मांगे जाने पर शिकायत कर रहे हैं. मेयर के पास आने वाले फोन में लोग कंपनी के कर्मचारियों की शिकायत करते हुए पैसे मांगने का आरोप लगा रहे हैं. कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि हर वार्ड में जहां हम सर्वे के लिए जाते हैं कुछ लोग पैसे देने में आनाकानी करते हैं जिससे हमारा काम प्रभावित होता है. पैसों के लिए बहस करने के बजाए हम आगे बढ़ जाते हैं. अभी तक हुए कामों में कई लोगों ने पैसे नहीं दिए हैं. हालांकि अधिकांश पैसे दे देते हैं.

48 हजार का हो चुका है सर्वे

नगर निगम के दायरे में 1.25 लाख मकान हैं जिसमें 13 लाख के आसपास लोग रहते हैं. कंपनी अभी तक 48 हजार मकानों का सर्वे कर चुकी है और दावा करती है कि चार महीने में बाकी भी पूरे कर लिए जाएंगे. कंपनी के एजेंट के अनुसार सर्वे किए गए 48 हजार मकानों में से 30 हजार के करीब में नंबर प्लेट लगाया जा चुका है. 50 रुपए का शुल्क नहीं मिल पाने के कारण कंपनी का काम बाधित होता है.

वर्जन

कंपनी को सर्वे के लिए नगर निगम की ओर से अधिकृत किया गया है. 50 रुपए शुल्क के एवज में कंपनी लोगों से डाटा कलेक्ट करके एल्युमिनियम की नंबर प्लेट लगाएगी. शिकायत करने वालों को समझाने के बाद वह मान जाते हैं.

- सीताराम जायसवाल, मेयर