ह्मड्डठ्ठष्द्धद्ब : एक तरफ गर्मी की मार, ऊपर से बिजली की आंखमिचौली और ऐसे में पानी न मिले तो सोचो क्या हो? राजधानी रांची में पावर कट का असर पानी की कीमत पर पड़ रहा है. सरकारी आरओ से मिलने वाला सात रूपये का पानी खुले बाजार में 30 रूपये में बेचा जा रहा है. निगम के आरओ प्लांट में बिजली कट जाने से पानी का स्टॉक नही हो पा रहा है जिस वजह से पानी की कीमत बढ रही है. गर्मी की वजह से पानी की डिमांड भी बढ़ गयी है जिस वजह से कई प्लांटों पर लंबी कतार लग रही है.

काट रहे चांदी

दो सालों में राजधानी के गली मोहल्ले में निजी वाटर प्लांटों की तादाद काफी बढ़ गई है. आंकड़ों के अनुसार राजधानी में करीब 500 पानी के कारोबारी हैं जो अपना ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर पानी सप्लाई का काम कर रहे हैं. आम दिनों में उनका व्यवसाय मंदा रहता है, लेकिन गर्मी के दिनों में उनका व्यवसाय तीन सौ गुणा बढ़ गया है.

पाताल में जा रहा ग्राउंड वाटर लेवल

राजधानी में बोतलबंद पानी का कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है. भूमिगत पानी की पैकेजिंग को रोकने के लिये सरकार पर पास कोई भी कानून नहीं है. इससे भूमिगत जलस्तर में गिरावट तो आ रही है साथ ही सरकार को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है. इसके अलावा रांची में 12 ऐसी कंपनियां हैं, जो केन्द्र सरकार के मानकों का का अनुपालन करते हुए पानी का कारोबार कर रही हैं.

कहां-कहां पानी का हो रहा कारोबार

कोकर, चुटिया, मोराबादी, रातू, कांके , बरियातू समेत रांची के कई प्रमुख इलाकों में जार में पानी पैक कर बेचा जा रहा है. अगर कोई इनकी यूनिट से पानी लेता है तो उनसे 10 रूपये से लेकर 15 रूपये वसूले जाते हैं और होम डिलेवरी के लिये 30 से पचास रूपये वसूले जा रहे हैं.