RANCHI: सरकारी स्कूलों को मिलने वाले अनुदान पर रिजल्ट का पेंच फंस गया है. मैट्रिक के खराब रिजल्ट को देखते हुए सरकार ने तय किया है कि अब पहले की तरह इन स्कूलों को अनुदान की रेबडि़यां नहीं बांटी जाएंगी. अनुदान की राशि केवल उन्हीं स्कूलों को दी जाएगी जिनके स्टूडेंट्स ने इस बार की परीक्षा में बेहतरीन रिजल्ट दिया है. रिजल्ट के आधार पर स्कूलों को अनुदान देने की इस नई व्यवस्था को लेकर राज्य भर के अनुदान प्राप्त स्कूलों में आर्थिक संकट गहरा सकता है. रांची में 55 अनुदान प्राप्त स्कूल हैं.

569 स्कूलों में 11 लाख बच्चों पर असर

स्टेट में 305 स्थापना अनुमति प्राप्त,185 प्रस्वीकृत इंटर कॉलेज, 39 प्रस्वीकृत संस्कृत हाइस्कूल और 40 प्रस्वीकृत मदरसा स्कूल शामिल हैं. इन सबको सरकार बिहार की तर्ज पर वर्ष 2004 से अनुदान देती आ रही है. इन स्कूलों में तकरीबन 11 लाख बच्चे पढ़ाई करते हैं, जिन्हें सरकार के अनुदान से काफी लाभ मिलता है. अनुदान राशि नहीं मिलने से इन स्टूडेंट्स की पढ़ाई पर असर पड़ेगा.

तीन श्रेणियों में मिलता है अनुदान

-जिन स्कूलों में 500 तक स्टूडेंट्स हैं उन्हें 13 शिक्षक और दो गैर शिक्षक स्टाफ के लिए सात लाख बीस हजार

-500 से ज्यादा और 1000 से कम स्टूडेंट्स वाले स्कूलों को नौ लाख 60 हजार

-1000 से ज्यादा स्टूडेंट्स वाले स्कूलों को 14 लाख 40 हजार का अनुदान हर वर्ष मिलता है.

अनुदान में अच्छे-बुरे का फर्क नहीं, उठे सवाल

सरकार का मानना है कि अनुदान लेने वाले कई ऐसे स्कूल हैं, जो मैट्रिक और इंटर में नब्बे प्रतिशत तक रिजल्ट देते हैं. पर कई स्कूल ऐसे भी हैं जिनका रिजल्ट चालीस प्रतिशत तक भी नहीं होता है. लेकिन अनुदान में अच्छे और बुरे का कोई फर्क नहीं रहता. लिहाजा अनुदान कमिटी का मानना है कि स्कूलों को मिलने वाली राशि उनके रिजल्ट के प्रतिशत के आधार पर तय की जाएगी.

20 जून से शुरू होगी स्क्रूटनी

रांची में करीब 55 स्कूल अनुदान प्राप्त हैं. इन सभी स्कूलों समेत स्टेट के सभी अनुदान प्राप्त स्कूलों में 20 जून से रिजल्ट की स्क्रुटनी शुरू की जाएगी. शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के डीईओ को निर्देश जारी कर दिए हैं और क्रॉसलिस्ट का इंतजार है.

वर्जन

सरकार का आदेश मिला है और अगले हफ्ते से स्क्रूटनी शुरू कर दी जाएगी. जिन स्कूलों का रिजल्ट अच्छा है उन्हें अनुदान जरूर मिलेगा. स्कूलों का दावा है कि अनुदान प्राप्त स्कूलों के बच्चों ने बेहतरीन रिजल्ट किया है.

-रतन कुमार महावर, डीईओ, रांची