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ALLAHABAD : जीएसटी काउंसिल ने तिमाही रिटर्न को वैकल्पिक करने का निर्णय लिया है। छोटे व्यापारियों को भी यह छूट होगी कि वे चाहे तो मंथली रिटर्न भर सकते हैं। रिटर्न भरते समय जीएसटी नंबर डालते ही फर्म का नाम वगैरह ऑटो पापुलेटेड जेनरेट हो जाएगा। इसी तरह की कई सुविधाओं के साथ जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी रिटर्न को एक पेज में समेटते हुए व्यापारियों की शिकायतों को दूर करने का प्लान बनाया है। वहीं नए फार्मेट को लागू करने से पहले व्यापारियों से सुझाव भी मांगा है, जिसके लिए एक महीने का समय दिया गया है। सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट में व्यापारी अपने सुझाव दे सकते हैं।

लंबे समय से हो रही थी मांग
1 जुलाई, 2017 को पूरे देश में लागू जीएसटी का जमकर विरोध हुआ, जो पूरे साल जारी रहा। इसमें जीएसटी के रिटर्न शिड्यूल को क्रिटिकल बताते हुए सरलीकरण की मांग की जा रही थी। जीएसटी काउंसिल की 28वीं मीटिंग में गंभीरता से लेते हुए रिटर्न सरलीकरण का निर्णय लिया गया था। इस पर फास्ट कार्रवाई करते हुए जीएसटी काउंसिल ने 31 जुलाई को रिटर्न का नया फार्मेट जारी कर दिया।

सरलीकरण में शामिल सुविधाएं
जीएसटी रिटर्न को सिम्प्लीफाई करते हुए जीएसटी काउंसिल ने एक पेज में सारी डिटेल दिए जाने का प्रावधान किया है।
- इसमें जीएसटी नंबर डालने के बाद व्यापारियों को फर्म लीगल नाम, ट्रेड नाम, एआरएन नंबर लिखना नहीं पड़ेगा।
- जीएसटी नंबर डालते ही सब कुछ ऑटोपॉपुलेटेड होगा।
- वहीं माल सप्लाई करने वाली पार्टी का जीएसटी नंबर, प्लेस ऑफ सप्लाई के साथ ही डॉक्यूमेंट की डिटेल देनी होगी।
- सेंट्रल या सीजीएसटी, एसजीएसटी, आईजीएसटी से माल खरीदा है तो कॉलम भरना होगा।
- कोई परचेज किया है तो किस जीएसटी के अनुसार यह बताना होगा।
- रिवर्स चार्ज अगर किया है तो उसके लिए अब अलग से फार्म नहीं भरना पड़ेगा।
- अभी तक रिवर्स चार्ज के लिए व्यापारियों को अलग फार्म भरना पड़ता है।
- सरकार ने पहली बार प्रोफाइल बेस्ड रिटर्न फॉर्मेट तैयार किया है।
- सरकारी नोट्स में कहा गया है कि कुछ कारोबारी एक खास तरह का कारोबार करते हैं या विशेष कमोडिटीज में डील करते हैं। उसके मुताबिक तीन चार पूर्व निर्धारित प्रोफाइल तय किए गए हैं, जिसमें खुद को रखने के बाद कारोबारी उसी प्रोफाइल फॉर्मैट में रिटर्न भरेंगे।
- छोटे कारोबारियों को लगातार अपने इनवॉइसेज अपलोड करने की छूट होगी।
- हर महीने की 10 तारीख तक अपलोड किए गए इनवॉइस अगले महीने रेसिपिएंट के इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए उपलब्ध होंगे।
- एचएसएन कोड केवल चार डिजिट में देना होगा, इससे ज्यादा के कोड तिमाही रिटर्न में दर्ज कराए जा सकते हैं।
- टर्नओवर की गणना पिछले वित्त वर्ष में दर्ज कारोबारी आंकड़े के आधार पर होगी।

व्यापारियों की समस्याओं और मांग को पहली बार जीएसटी काउंसिल ने गंभीरता से समझा है और एक कदम आगे बढ़ाते हुए रिटर्न सरलीकरण का नया फॉर्मेट जारी किया है। अब व्यापारियों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपनी बात जीएसटी काउंसिल तक पहुंचाएं और नए फार्मेट को लागू होने के बाद उसके अनुसार ही व्यापार करें।
-संतोष पनामा संयोजक, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति

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