-दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी खबर

-निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़पने का मामला

द्यह्वष्द्मठ्ठश्र2@द्बठ्ठद्ग3ह्ल.ष्श्र.द्बठ्ठ

रुष्टहृयह्रङ्ख : जेकेवी लैंड डेवलपर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी संचालकों को शिकायत मिलने पर दबोचने और फिर रहस्यमय हालात में छोड़ देने के मामले में गुडंबा पुलिस की भूमिका की जांच होगी. दैनिक जागरण आईनेक्स्ट द्वारा इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद आईजी रेंज सुजीत पांडेय ने एसएसपी लखनऊ कलानिधि नैथानी को लखनऊ पुलिस पर लगे संगीन आरोपों की तीन दिनों में जांच कराकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. जिसके बाद एसएसपी ने यह जांच एएसपी पूर्वी विक्रांत वीर को सौंपी है.

ईडी की छापेमारी के बाद उठे सवाल

गौरतलब है कि जेकेवी लैंड डेवलपर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों के द्वारा निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़पकर उस रकम से लखनऊ में अपार्टमेंट व अन्य संपत्तियां जुटाने का मामला सामने आया है. आरोपितों के खिलाफ निवेशकों ने मऊ में एफआइआर दर्ज कराई थी. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को मामले में केस दर्ज कर कंपनी के प्रबंध निदेशक राजेश सिंह के ठिकानों पर छापे मारे थे. इस बीच सामने आया कि बीते दिनों गुडंबा पुलिस ने राजेश सिंह की पत्नी प्रियंका सिंह को पकड़ा था, लेकिन बाद में लखनऊ पुलिस के एक अधिकारी के कहने पर उसे थाने से छोड़ दिया गया था. आरोपी दंपती के खिलाफ ईडी की जांच बढ़ने के साथ ही लखनऊ पुलिस की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए थे. पुलिस के रवैये से नाराज निवेशकों ने 10 जून को गुडंबा थाने का घेराव कर प्रदर्शन भी किया था.

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बिल्डरों के बैंक खातों की भी होगी पड़ताल

कंपनी संचालकों ने जिन बिल्डर्स के साथ मिलकर टेढ़ी पुलिया पर अपार्टमेंट बनाया था, ईडी उनके बैंक खातों की भी पड़ताल करेगी. ईडी अधिकारियों को आशंका है कि कहीं निवेशकों से हड़पी गई रकम का लेनदेन बिल्डर्स के साथ भी तो नहीं हुआ था.

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एमओयू में तय की थी गाइडलाइन

निवेशकों का दबाव बढ़ने पर राजेश सिंह व अन्य कंपनी संचालकों के बीच एमओयू भी साइन किया गया था. एमओयू में जेकेवी लैंड डेवलपर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड (ग्रुप ऑफ कंपनीज) का रजिस्ट्रेशन 15 जुलाई 2009 को महात्मा गांधी मार्ग, हजरतगंज के पते पर कराये जाने की बात कही गई है. कंपनी का प्रबंध निदेशक दीपक शुक्ला को बताया गया है. जुलाई 2018 में साइन किए गए एमओयू में राजेश सिंह को पूर्व निदेशक बताया गया और वर्तमान व पूर्व निदेशकों के बीच कई शर्ते भी तय की गई थीं. एक गाइडलाइन भी तय की गई थी. प्लाट व फ्लैट बुक करने वालों से उसकी बकाया रकम कंपनी में जमा कराने की बात भी कही गई थी.