- चिकित्सा शिक्षा विभाग का आदेश, हर महीने हो मौतों की समीक्षा, हर डिपार्टमेंट में गठित होगी ऑडिट टीम

-हैलट और उससे संबद्ध एक दर्जन अस्पतालों में हर महीने करीब एक हजार मरीजों की हो जाती है मौत

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KANPUR: प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल्स में शुमार हैलट व संबद्ध अस्पतालों में हर महीने होने वाली सैकड़ों मरीजों की मौतों का अब ऑडिट होगा. यह कवायद सरकारी अस्पतालों में मरीजों के डेथ रेट को कम करने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने शुरू की है. इससे पहले हैलट व संबद्ध अस्पतालों में इंफेक्शन कंट्रोल करने के लिए कमेटी बनाई गई थी. इस बाबत प्रमुख अधीक्षक प्रो.आरसी गुप्ता ने प्रमुख क्लीनिकल डिपार्टमेंट्स के हेड के साथ बैठक कर आदेश का अनुपालन कराने को कहा.

मौतें कम करने पर हो काम

अभी हैलट व संबद्ध अस्पतालों में होने वाली मरीजों की मौत की समीक्षा के लिए एक सेंट्रल कमेटी है, लेकिन नए आदेश के बाद अब ऑर्थोपेडिक, पीडियाट्रिक, मेडिसिन, सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, गाइनी व टीबी चेस्ट विभाग में ऑडिट कमेटी गठित की जाएगी. जोकि महीने में दो बार विभाग में हुई मरीजों की मौतों का असेसमेंट करेगी. अभी जो मरीज हैलट हॉस्पिटल में आते हैं उनमें से बड़ी संख्या क्रिटिकल मरीजों की भी होती है. जिनके बचने की उम्मीदें कम होती है.

एलएलआर अस्पताल एक नजर में-

- 10 लाख से ज्यादा मरीजों की ओपीडी

- 60 हजार से ज्यादा मरीजों की भर्ती हर साल

-130 मरीजों की औसत भर्ती हर दिन

- 20 से 25 मरीजों की औसतन रोजाना मौत

- 1000 के करीब मरीजों की मौत हर महीने

न्यूरो सर्जरी, आर्थोपेडिक, मेडिसिन, गायनी, पीडियाट्रिक, टीबी चेस्ट विभाग में होती हैं सबसे ज्यादा मौतें

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वर्जन-

हैलट व संबद्ध अस्पतालों में हर रोज होने वाली मौतों पर हर महीने आडिट होगा. शासन की मंशा है कि अस्पतालों में बेहतर इलाज के जरिए रोज होने वाली मौतें कम की जाएं. इसके लिए मेन क्लीनिकल डिपार्टमेंट में आडिट कमेटी का गठन किया जाएगा.

- प्रो. आरसी गुप्ता, एसआईसी, एलएलआर व संबद्ध अस्पताल

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सबसे बड़ा रेफरल सेंटर

हैलट हॉस्पिटल में मरीजों की मौत का आंकड़ा काफी ज्यादा होने की कई वजह हैं. हैलट कानपुर सहित आसपास के जिलों का सबसे बड़ा रेफरल सेंटर है. सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल होने वालों को भी हैलट लाया जाता है. यहां तक कि बड़े से बड़ा प्राइवेट हॉस्पिटल भी जब हाथ खड़े कर देता है तो परिजन उसे लेकर हैलट पहुंचते हैं. अक्सर मरीज इस हालात में हैलट पहुंचते हैं कि डॉक्टर के पास भी कुछ करने का समय नहीं होता है. हालांकि हैलट के डॉक्टर्स कई बार ऐसे मरीजों को भी नया जीवन देते हैं. इंफेक्टशन का लेवल भी काफी हाई होने के कारण मरीज मौत के मुंह में चले जाते हैं.