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JAMSHEDPUR: जमशेदपुर में झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या बढ़ती जा रही है. इन पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ विभाग कुछ नहीं कर रहा है. आईएमए के सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि जिले में 150 झोला छाप डॉक्टर हैं. वहीं, प्रदेश में 550 झोलाछाप डॉक्टर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं. आईएमए के सर्वे के अनुसार ज्यादातर झोलाछाप डॉक्टर जमशेदपुर शहरी इलाकों तथा घाटशिला, बहरागोड़ा, तथा ग्रामीण इलाकों में ज्यादा है. आईएमए का कहना है कि ऐसे ही सरकार कुछ नहीं करेगी तो झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या बढ़ सकती है. आईएमए की रिपोर्ट संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास जाने के बाद भी स्वास्थ विभाग द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों के पहचान तथा कारवाई के लिए अब तक कोई अभियान नहीं चलाया गया है.

सरकार को दिया ज्ञापन

आईएमए की रिपोर्ट पर सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाने से नाराज आईएमए ने पिछले दिनों सरकार को ज्ञापन सौंपा था. इसमें कहा गया था कि वैसे डॉक्टरों के सेर्टिफिकेट तथा डिग्री की जांच हो तथा फर्जी डिग्री वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई हो तथा उनकी दुकानदारी बंद की जाए. झोलाछाप डॉक्टरों के कारण कई मरीज अपने जान से हाथ धो बैठे हैं.

ग्रामीण इलाकों में ज्यादा

सिटी से दूरदराज के इलाकों व ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या सबसे ज्यादा है. इन इलाकों में डॉक्टर जाना नहीं चाहते है, तथा झोलाछाप डॉक्टर ग्रामीण इलाकों में क्लीनिक खोलकर खूब पैसा कमाते हैं. प्रशासन इस पर आंख मूंदे हुए है. लोग ज्यादातर छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज कराने झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाते हैं. गलत दवाई देने तथा बीमारी की जानकारी सही नहीं होने की वजह से मरीजों का सही ढंग से इलाज नहीं हो पाता है. आईएमए के उपाध्यक्ष मृत्युंजय सिंह ने बताया एमजीएम हॉस्पिटल में ज्यादातर मरीज सीरियस केस में पहुंचते हैं. उनमें कई केस मरीज की स्थिति सीरियस झोलाछाप डॉक्टरों की वजह होती है, क्योंकि मरीजों को ना तो सही दवा दे पाते हैं तथा कौन सी बीमारी ग्रसित है ठीक से ना बता पाते है. आईएमए के सर्वे के अनुसार राज्य में डॉक्टरों की कमी की वजह से झोलाछाप डॉक्टरों का कारोबार फलफूल रहा है.

आईएमए ने सभी झारखंड के सभी जिलों से झोलाछाप डॉक्टरों की सूची तैयार की है. सूची सरकार तथा जिला प्रशासन तथा स्वास्थ विभाग को मुहैया कराई गई है. इस पर स्वास्थ विभाग कुछ नही कर रही है, इसपर हमने सरकार को ज्ञापन पिछले दिनों सौंपा था, पर अब तक सरकार ने फर्जी डिग्री धारक डॉक्टरों को हटाने तथा डिग्री जांच के लिए अभियान नहीं चलाया है. झोलाछाप डॉक्टरों के कारण ज्यादातर मरीज सीरियस कंडीशन में अस्पताल पहुंचते हैं और मौत का शिकार बन जाते हैं.

-मृत्युंजय सिंह, उपाध्यक्ष, आईएमए, जमशेदपुर