क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : प्रिंसिपल सेक्रेटरी हेल्थ निधि खरे शनिवार को रिम्स का औचक निरीक्षण करने पहुंचीं. इस दौरान उन्होंने जन औषधि काउंटर देख डायरेक्टर से पूछा कि यहां दवाएं अवेलेबल हैं? साथ ही उन्होंने पूछा कि डॉक्टर पेशेंट्स को जेनरिक दवाएं लिखते हैं कि नहीं? इस पर डायरेक्टर ने उन्हें जवाब दिया कि केंद्र में 300 से अधिक दवाएं हैं. इसके बारे में डॉक्टरों को भी जानकारी है. लेकिन जूनियर से लेकर सीनियर तक कोई जेनरिक दवाएं नहीं लिखता है. इसके बाद हेल्थ सेक्रेटरी बिना कुछ कहे वहां से निकल गईं.

डिस्पेंसरी में सिर्फ 23 दवाएं

इंस्पेक्शन के दौरान एडिशनल डायरेक्टर अमित कुमार ने निधि खरे को बताया कि हॉस्पिटल की डिस्पेंसरी में मात्र 23 दवाएं ही अवेलेबल हैं. जहां से मरीजों को फ्री दवा मिलती है. वहीं पारासिटामोल जैसी दवा के लिए भी मरीजों को बाहर की दुकानों की दौड़ लगानी पड़ती है. साथ ही उन्होंने बताया कि डिस्पेसरी से जब दवा की मांग की जाती है तो नॉट अवेलेबल (एनए) लिखकर भेज दिया जाता है.

कॉर्निया ट्रांसप्लांट टीम को बधाई

इससे पहले वह रिम्स के आई डिपार्टमेंट में पहुंचीं. जहां कॉर्निया ट्रांसप्लांट के मरीजों से मिलकर उनका हाल जाना. वहीं कॉर्निया ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर्स और उनकी टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि रिम्स के लिए यह ऐतिहासिक पल है. इसी उद्देश्य के साथ आगे भी डॉक्टरों को बेहतर काम करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इस वर्ष 250 मरीजों का कार्निया ट्रांसप्लांट करने का टारगेट रखें. इसके लिए ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया भी आनलाइन करने की जरूरत है.

आयुष्मान भारत की सुविधा हर किसी को मिले

आई डिपार्टमेंट से निकलने के बाद निधि खरे सीधे आयुष्मान भारत के तहत रिम्स में खोले गए काउंटर की व्यवस्था देखने पहुंची. इसके बाद उन्होंने कहा कि यहां पर पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की जरूरत है ताकि मरीजों को इसका लाभ मिल सके. इसके अलावा आयुष्मान भारत के होर्डिग और पोस्टर भी लगाने का आदेश उन्होंने दिया. ऐसे में इलाज के लिए आने वाले लोगों को भी इस योजना का पता चलेगा. उन्होंने कहा कि इसके तहत नाम जोड़ने के काम में भी तेजी लाएं. इससे मरीजों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा और फ्री इलाज होगा.