क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : खूंटी स्थित सहयोग विलेज में बच्ची पालो टूटी की हुई मौत मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पीडि़त पक्ष के एडवोकेट ने खूंटी थाने में आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और बच्ची के पिता को मुआवजा देने की भी मांग की. इस मामले में सरकार ने जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है. प्रार्थी की ओर से अदालत में बताया गया कि पालो टूटी की मौत के मामले में रांची सीडब्ल्यूसी, खूंटी सीडब्ल्यूसी और सहयोग विलेज खूंटी के पदस्थापित लोगों की भूमिका संदिग्ध है.

प्रभावित हो सकती जांच

चूंकि, सीडब्ल्यूसी सरकार की एक ईकाई है. ऐसे में उनके विरूद्व प्राथमिकी दर्ज कर पुलिसिया छानबीन में जांच प्रभावित होने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है. ऐसे में अदालत इस मामले में स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराए. अदालत ने पूछा कि आखिर इस मामले में अपडेट किया है. क्या खूंटी थाने में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है. अदालत ने एक घंटे में इसका जबाब मांगा. जबाब मांगे जाने पर बचाव पक्ष की ओर से दो सप्ताह का समय मांग लिया गया, ताकि अदालत को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा सके.

चार बच्चियों की हो चुकी है मौत

गौरतलब हो कि छह जुलाई को 22 बच्चों को बाल कल्याण समिति रांची ने अपने कब्जे में लिया था. सहयोग विलेज खूंटी में 22 में से 12 बच्चों को रखा गया था. इनमें से चार बच्चियों की मौत हो चुकी है. 19 सितंबर को पालो टूटी (पिता प्यारण टूटी) नामक बच्ची की मौत हो गई थी. इसी दिन सहयोग विलेज खूंटी की एक अन्य बच्ची चंचला की भी मौत हो गयी, जबकि 21 सितंबर को सहयोग विलेज खूंटी की एक और की मौत रिम्स में इलाज के दौरान हो गई थी. इसके अलावा पांच दिसंबर को आयरा की मौत के साथ यहां मृतकों की संख्या चार तक पहुंच चुकी है.