-भारत में हर साल दिल के दौरे के 20 लाख मामले सामने आते हैं

-पुरुष और महिला दोनों को समान रूप से खतरा है

BAREILLY :

श्री राममूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड साइसेंज में मंडे को सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दीप चन्द्र पंत ने हार्ट से संबध में कई महत्वपू्रर्ण जानकारी दी. उन्होंने बतायसा कि ताजा आंकड़ों के अनुसार हार्ट अटैक पीडि़त 50 प्रतिशत युवा है. जिसमें महिला और पुरुष दोनों की संख्या लगभग बराबर की है. इसको लेकर उन्होंने जानकारी बचाव और संकेत भी बताए. उन्होंने इस दौरान पीडि़त व्यक्ति के प्राथमिक उपचार के बारे में भी बताया.

कैसे होती है तकलीफ

डॉ. दीप चन्द्र पंत, सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, ने कहा, 'इस्कैमिया के कारण दिल की मांसपेशियों के एक हिस्से की क्षति या मृत्यु को दिल का दौरा कहा जाता है. दिल के कुछ चेतावनी संकेतों में हमले छाती में असुविधा, शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द और सांस की तकलीफ प्रमुख हैं. एक असामान्य अनुभव भी होता है, जिसकी शुरुआत छाती के केंद्र में होती है और बाहर की ओर निकलती है. छाती में असुविधा आमतौर पर कुछ ही मिनटों में चली जाती है, हालांकि, वो लौटती भी है. कुछ लोगों में, एक या दोनों हाथों, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट में असुविधा या दर्द महसूस हो सकता है. महिलाओं में सांस की तकलीफ के अलावा कुछ समान लक्षण भी होते हैं. इसका कारण जंक फूड का सेवन और व्यायाम की कमी प्रमुख है.

दे सकते हैं प्राथिमक उपचार

दिल के दौरे की स्थिति में, रोगी को एक सख्त बिस्तर पर सीधा करके लिटा दें. सांस लेने के मार्ग को साफ करके उसे कुछ गहरी सांसें लेने को कहें. अगला कदम गर्दन की किसी भी तरफ से नाड़ी की जांच करना है. यदि मरीज को उल्टी लग रही है, तो उन्हें एक तरफ घुमाएं और उल्टी करने दें. इससे कचरा फेफड़ों की ओर नहीं जाएगा. अंत में, दिल में रक्त की आपूर्ति में सुधार करने के लिए दोनों पैरों को उठाएं.