व‌र्ल्ड हाइपरटेंशन डे स्पेशल

-नियमित जीवन शैली ने कइयों को दिलाई है बीमारी से निजात

- डब्ल्यूएचओ ने इस बार की थीम रखी है 'नो योर नंबर्स'

PRAYAGRAJ: क्या आपको अपना नंबर पता है? नहीं पता तो आज ही पता लगाइए। यह आपकी सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दरअसल, डब्ल्यूएचओ ने इस साल व‌र्ल्ड हाइपरटेंशन डे की थीम 'नो योर नंबर्स' रखी है। इसका मतलब है आपका ब्लड प्रेशर खतरे के निशान से नीचे है या ऊपर। केवल शहर की बात करें तो ब्लड प्रेशर मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में हर व्यक्ति को खुद को फिट रखने के लिए बीपी को संभालकर रखना होगा।

140 पार हो जाए तो खतरा समझो

हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर से लोगों को अवेयर करने के लिए हर साल 17 मई को व‌र्ल्ड हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है। डॉक्टर्स का कहना है कि नियमित तौर पर बीपी की जांच करानी चाहिए। अगर ब्लड प्रेशर 140 से अधिक है तो अलर्ट होना जरूरी है। क्योंकि इससे अधिक नंबर होने का मतलब है कि बॉडी में साइलेंट किलर ने दस्तक दे दी है। ऐसे में नियमित लाइफ स्टाइल और खानपान के जरिए इस बीमारी से बचा जा सकता है।

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अपने जज्बे से बीमारी को जीता

हाइपरटेंशन की चपेट में आने के बाद मरीज खुद को इस खतरे से बचा भी सकता है। फिजीशियन डॉ। आनंद सिंह कहते हैं कि शुरुआत में मरीज हाई बीपी की चपेट में आने के बाद घबरा जाता है। लेकिन, नियमित जीवन शैली और बेहतर खानपान से पुन: वह खतरे से बाहर आने में सफल होता है। ऐसे कई मरीज हैं जिन्होंने संयमित जीवन और एक्सरसाइज को फॉलो करके खुद को फिट कर लिया है।

यह हैं वजहें

-देर रात को भोजन करना

-स्मार्टफोन पर लंबे वक्त तक समय बिताना

-शारीरिक व्यायाम न करना

-स्ट्रेस, गलत खानपान और आधुनिक जीवन शैली

यह लक्षण दिखें तो सावधान

-हाइपरटेंशन में चक्कर आना

-धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाना

-सिर दर्द की शिकायत

-बेचैनी, थकान, अनिद्रा, आक्रोश आदि

फ्री में कराइए सेहत की जांच

स्वास्थ्य विभाग की एनसीडी सेल द्वारा शुक्रवार को हाइपरटेंशन डे के मौके पर फ्री हेल्थ चेकअप कैंप लगाया जाएगा। मॉर्निग में 6 से 9 बजे के बीच कंपनी बाग और इसके बाद सुबह 10 से दोपहर 2 बजे के बीच काल्विन हॉस्पिटल में हेल्थ कैंप लगेगा।

वर्जन

हाइपरटेंशन नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज है और इसके बावजूद मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बीमारी के चलते बॉडी के दूसरे अंग भी अफेक्ट होते हैं। इस साइलेंट किलर से लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार कार्यक्रम संचालित कर रहा है।

-डॉ। वीके मिश्रा, नोडल, एनसीडी सेल