- नेशनल पा‌र्क्स में बाघों की सुरक्षा को लेकर अफसरों के रवैये से कोर्ट नाराज

- एसीएस द्वारा कोर्ट में पेश किए हलफनामे को बताया गैर जिम्मेदाराना

नैनीताल : कॉर्बेट समेत अन्य नेशनल पार्कों में बाघों की सुरक्षा के लिए अफसरों के रवैये पर हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी दिखाई है. इस मामले में हाई कोर्ट द्वारा मुख्य सचिव का जवाब तलब किया गया था. इस संबंध में अपर मुख्य सचिव द्वारा कोर्ट में हलफनामा पेश किया गया जिसे कोर्ट ने गैर-जिम्मेदाराना करार दिया, कहा कि पूर्व पारित आदेशों को तोड़मरोड़ कर गुमराह करने वाला शपथ पत्र पेश किया गया है. कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए अपर मुख्य सचिव व मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को आज (शुक्रवार)दोपहर दो बजे तक कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यहां तक टिप्पणी कर दी कि अगर राज्य सरकार वन्य जीवों को बचाने में नाकाम है तो अन्य नेशनल पार्को में वन्य जीवों को शिफ्ट किया जा सकता है.

आज दोपहर तक कोर्ट में पेश होने के आदेश

गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ में हिमालयन युवा ग्रामीण विकास संस्थान रामनगर की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. कोर्ट के समक्ष अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह की ओर से हलफनामा प्रस्तुत किया गया. खंडपीठ ने शपथ पत्र पढ़ा तो उसमें अदालत द्वारा पूछे गए सवालों के गोलमोल जवाब दिए गए थे. कॉर्बेट नेशनल पार्क में छह जोन हैं और प्रत्येक जोन में 20-20 वाहनों की अनुमति के आदेश दिए थे, लेकिन प्रत्येक जोन में सौ-सौ वाहन चलाने का शपथ पत्र पेश किया गया है. अपर मुख्य सचिव की ओर से कहा गया है कि वह सारा रिकॉर्ड लेकर मालसी रेंज के फॉरेस्ट गार्ड अंकुर शर्मा के पास गए और गार्ड ने ही रिकॉर्ड सत्यापन किया. शपथ पत्र में रिकॉर्ड संलग्न होने की बात कही थी, लेकिन कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था. इस पर कोर्ट ने टिप्पणी कि यह हाल प्रदेश को चलाने वाले अपर मुख्य सचिव के हैं. खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद शुक्रवार को एसीएस डॉ. रणवीर सिंह और मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को कोर्ट में स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं.