हाई कोर्ट खफा, याचिका खारिज, हर्जाना राशि केरल के बाढ़ पीडि़तों जाएगी

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नैनी इलाहाबाद के नई बाजार चक गुलाम मोहम्मद अम्बेडकर कालोनी के 43 मकानों को अतिक्रमण ध्वस्तीकरण अभियान के तहत तोड़े जाने की न्यायिक जांच कराने और इंदिरा आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना उत्तरी लोकपुर में बने आवासों का आवंटन न कर 6-7 साल से खाली रखने की जांच की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका हर्जाने के साथ खारिज कर दी है. कोर्ट ने एक ही मुद्दे को लेकर दुबारा याचिका दाखिल करने पर 25 हजार रुपये हर्जाना लगाया है और निर्देश दिया है कि दो हफ्ते के भीतर यह राशि मुख्यमंत्री बाढ़ राहत कोष केरल के खाते में जमा कराने के लिए ड्राफ्ट दाखिल करे.

जनहित याचिका दाखिल थी

यह आदेश चीफ जस्टिस डीबी भोसले तथा जस्टिस एमके गुप्ता की खण्डपीठ ने भगवती प्रसाद पांडेय व देवेंद्र कुमार तिवारी की जनहित याचिका पर दिया है. याचिका पर अधिवक्ता बीसी श्रीवास्तव व सुनीता शर्मा ने बहस की. मालूम हो कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया को दी गयी टीएसएल की जमीन से अवैध रूप से वर्षो से मकान बनाकर रह रहे लोगों को बेदखल कर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गयी है. बेघर हुए 43 लोगों के रिहायशी इंतजाम को लेकर दाखिल याचिका पर कोर्ट ने जिलाधिकारी इलाहाबाद को किसी आवास योजना में पात्र पीडि़त लोगों की आवास देने पर विचार करने का आदेश दिया. जिलाधिकारी ने पात्र व्यक्तियों को आवास दिये भी किन्तु कई के पास अपने आवास होने के नाते आवंटित नहीं किया. सभी को आवास न देने पर अवमानना याचिका दाखिल की गयी.

डीएम बोले 22 ही हकदार

जिलाधिकारी ने बताया कि 22 लोगों को हकदार पाया गया है. उन्हें आवास देने की कार्यवाही की जा रही है और आश्वासन दिया कि चार हफ्ते में जरूरी जांच की जायेगी. अवमानना याचिका निस्तारित कर दी गयी. इसके बाद दुबारा जनहित याचिका दाखिल कर जीवन के मूल अधिकार के वितरीत वर्षो से रह रहे लोगों के मकान ध्वस्तीकरण की न्यायिक जांच कराने की मांग की. कोर्ट ने कहा इसी मामले में दाखिल पूर्व याचिका यह मांग नहीं की गयी थी. उसी मुद्दे को दुबारा उठाने पर कोर्ट ने हर्जाना लगाते हुए याचिका खारिज कर दी.