स्वत. प्रेरित जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए बैठी सात जजों की लार्जर बेंच

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इलाहाबाद हाई कोर्ट में लम्बे अर्से बाद बैठी सात न्यायाधीशों की लार्जर बेंच की अगुवाई कर रहे चीफ जस्टिस गोविंद माथुर ने राज्य सरकार द्वारा छोटे मामलों में अपील दाखिल कर अनावश्यक मुकदमो का बोझ बढ़ाने पर आपत्ति करते हुए सरकार को मुकदमा नीति का पालन करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार से इस सम्बन्ध में कई बार पत्र लिखकर सुझाव मांगा किन्तु कोई जवाब नहीं आया. मुकदमो की संख्या घटाने में सरकार का सहयोग नहीं मिल रहा है.

केस पॉलिसी सहित अधीनस्थ अदालतों में मूलभूत सुविधाएं, ग्राम न्यायालय व विशेष अदालतों के गठन को लेकर सरकारी उदासीनता पर नाराजगी प्रकट की. बेंच ने सवाल उठाया कि विवेचना और प्रशासनिक पुलिस अलग क्यों नहीं हो सकती. राज्य सरकार से उठाये गये कदमों के ब्योरे की जानकारी मांगी है. याचिका की अगली सुनवाई 11 जनवरी को होगी. यह आदेश चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस भारती सप्रू, जस्टिस पंकज मित्तल, जस्टिस शशिकान्त गुप्ता व जस्टिस बीके नारायण की वृहदपीठ ने स्वत: प्रेरित जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है.

वकीलों को हड़ताल का कानूनी हक नहीं

सीतापुर में वकीलों पर पुलिसिया उत्पीड़न व वकीलों की हड़ताल पर भी वृहदपीठ ने सवाल उठाये. कोर्ट ने कहा कि वकीलों को हड़ताल पर जाने का कानूनी अधिकार नहीं है. फिर भी वकील हड़ताल पर जा रहे हैं. पुलिस प्रदेश की कानून व्यवस्था दुरुस्त नहीं कर पा रही. वकीलों का उत्पीड़न हो रहा है. प्रदेश में कानून व्यवस्था कायम रखना राज्य सरकार का दायित्व है. जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने पुलिस के विभाजन पर बल दिया और कहा कि प्रशासनिक व विवेचना करने वाली पुलिस अलग होनी चाहिए. ठीक से विवेचना न होने के कारण अदालतों में न्याय देने में दिक्कत आ रही है. उन्होंने अभियोजन की निगरानी तंत्र न होने पर भी अपर महाधिवक्ता का ध्यान आकृष्ट किया. जस्टिस अग्रवाल ने 2008 में बने ग्राम न्यायालय एक्ट का पालन न होने पर कहा कि सरकार पेपर वर्क कर रही है. ग्रामीण इलाके में दरवाजे पर न्याय देने के कानून के तहत प्रदेश में ग्राम अदालतों का गठन नहीं किया जा सका.

जजों को खुद लिखना पड़ रहा आदेश

कोर्ट ने जजों के स्टॉफ की कमी पर मुद्दा उठाया और कहा कि 2500 जजों के लिए 1900 स्टेनो ही हैं. कई जजों को स्वयं आदेश लिखना पड़ रहा है. जजों के बैठने के कमरे नहीं हैं. राज्य सरकार का पक्ष रख रहे अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने कोर्ट को मांगी गयी जानकारी उठाये गये कदमों के साथ उपलब्धियां करायेंगे. याचिका की सुनवाई 11 जनवरी को होगी.